
दुनिया में खुला जंग का एक और मोर्चा, अजरबैजान ने नागोरनो-कराबाख इलाके में की बमबारी
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अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच विवाद बढ़ गया है. झगड़े का इलाका नागोर्नो काराबाख है. वहां से आई तस्वीरें बता रही हैं कि तनाव कितना बढ़ गया है. कल अजबरबैजान ने अचानक हमला बोल दिया. हमले में इलाके में तैनात 2 जवान मारे गए और 19 जख्मी हो गए. यहां रूसी शांति सेना के साथ आर्मेनिया के भी सैनिक तैनात हैं. इस मिलिट्री ऑपरेशन में अजरबैजान ने नार्गोनो कराबाख के कई इलाकों पर भी कब्जा कर लिया. अजरबैजान की सेना ने अपने मिलिट्री ऑपरेशन को लेकर बयान जारी किया है. कहा है कि अजरबैजान ने अपने सैनिक अनार काजिमोव की हत्या का बदला लिया है. अजरबैजान के मुताबिक आर्मेनियाई मिलिशिया के लोग उसकी सीमा में आतंकी वारदात को अंजाम दे रहे हैं.

ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले को लेकर मचे घमासान के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कल मीडिया के सामने आकर युद्ध को लेकर कई बड़ी बातें कहीं नेतन्याहू ने ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका को घसीटने की फर्जी खबरों का खंडन किया. कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति हमेशा वही निर्णय लेते हैं जो उन्हें अमेरिका के हित में लगता है. उन्होंने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान इजरायल और अमेरिका के तालमेल की भी प्रशंसा की.

जिस ईरान को बर्बाद करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप निकले थे. अब लगता है कि उनका पैर उसी ईरान के 'तेल' पर फिसल गया है. और इसलिए वो एक बार फिर पूरी दुनिया को 'चौंकाने' वाला फैसला ले सकते हैं. और ये फैसला ईरान के तेल की Sale से जुड़ा है. ईरान को पूरी तरह से अलग-थलग करने और हर चीज के लिए 'मोहताज' बनाने की कोशिश करने वाले ट्रंप अब खुद ईरान के तेल से प्रतिबंध हटा सकते हैं. और तेल की Sale करने की अनुमति दे सकते हैं? अब सवाल ये है कि जब ट्रंप खुद ईरान के तेल की बिक्री के लिए तैयार हैं, तो वो ईरान से युद्ध क्यों लड़ रहे हैं? क्या वाकई ईरान ने ट्रंप को ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया है, या ट्रंप अपने ही फैसलों की फांस में फंस चुके हैं?











