
दुनिया में इतनी उथल-पुथल लेकिन जिनपिंग पिक्चर से गायब...चीन में क्या चल रहा है?
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चीन की राजनीति में सबसे ताकतवर शख्स की बात हो तो शी जिनपिंग का चेहरा सामने आ जाता है. नवंबर 2012 में वे कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी बने और इसके कुछ महीने बाद से ही राष्ट्रपति के पद पर भी हैं. लेकिन गोपनीयता मेंटेन करने वाले इस देश में सतह के नीचे काफी कुछ बदल सकता है. शक्ति किसी और के पास जा सकती है. और यह 'किसी और' भी तय नहीं.
दुनिया इन दिनों आग पर चढ़ी हंडिया बनी हुई है, जिसपर लगातार कुछ न कुछ खदबदा रहा है. कुछ देश लड़ने-भिड़ने में जुटे हुए हैं. कुछ सबसे बचने के लिए सैन्य ताकत बढ़ा रहे हैं. लेकिन इन सबसे बीच महाशक्ति बनने के करीब दिख रहा चीन चुप साधे हुए हैं. खासकर वहां के राष्ट्रपति शी जिनपिंग लगभग दो हफ्तों तक ग्लोबल पिक्चर से गायब रहे. न कोई बयान, न कोई अपीयरेंस. तो क्या चीन में सत्ता बदल रही है?
साल 2013 की शुरुआत में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की बागडोर अपने हाथों में लेने के बाद से जिनपिंग लगातार चर्चा में रहे. कभी वे पड़ोसियों से उलझे रहे, कभी किसी से शांति की अपील करते रहे, तो कई बार भारी कर्ज देकर ट्रैप करने की कथित आदत भी चीन के लीडर को घेरती रही.
एक दशक से ज्यादा वक्त के बाद जिनपिंग पहली बार गायब रहे. बीच में एकाध बार आए लेकिन वे किसी सार्वजनिक मौके पर नहीं दिख रहे. माना जा रहा है कि वे कुछ ही दिनों में ब्राजील में होने जा रही ब्रिक्स समिट से भी वे गैरमौजूद रहेंगे. माहौल अलग है, इतना अलग कि इस पर कम्युनिस्ट पार्टी के री-अलाइमेंट की चर्चा भी होने लगी.
कितनी बड़ी बात है सार्वजनिक मौकों पर न दिखना बीजिंग में यह बहुत बड़ी बात है. मई के आखिर से जिनपिंग की मौजूदगी एकदम से चली गई. न वे किसी परेड में आ रहे हैं. न कोई भाषण दे रहे हैं और न ही सरकारी मीडिया में दिख रहे हैं. सीएनएन की एक रिपोर्ट में टॉप खुफिया अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि जिनपिंग की अनुपस्थिति में कुछ अनयूजुअल नहीं. वहां बड़े लीडर्स को साइडलाइन करने का इतिहास रहा. दस्तावेजों पर भले नाम रहे, लेकिन चुपके से पावर कहीं और चली जाती है.
बीच में संक्षिप्त मौजूदगी दिखी

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