
दिल्ली में 8 साल पहले भी हुई थी 22 करोड़ की चोरी, कैश वैन लेकर भागा था ड्राइवर, 12 घंटे में ही सुलझ गया था केस
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वारदात 8 साल पहले की है. जब दिल्ली में लुटेरों ने एक कैश वैन को अपना निशाना बनाया था. एक ऐसी कैश वैन जिसमें 22 करोड़ रुपये नकद रखे थे. वो भी नौ बक्सों में. उस दिन दोपहर 2.30 बजे का वक्त था. कहानी का आगाज़ पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी इलाके से होता है.
देश की राजधानी दिल्ली के भोगल इलाके में मौजूद एक ज्वेलरी शो रूम में हुई 25 करोड़ से ज्यादा की चोरी की वारदात ने बेशक हर किसी को चौंका दिया हो, लेकिन दिल्ली में ऐसी बड़ी वारदात पहले भी हुई है. जिसमें एक कैश वैन में रखे करोड़ों रुपये ही लूट लिए गए थे. इस वारदात ने दिल्ली पुलिस को हलकान कर दिया था. चलिए आपको बताते हैं उस वारदात की पूरी कहानी.
26 नवंबर 2015 वो वारदात 8 साल पहले की है. जब दिल्ली में लुटेरों ने एक कैश वैन को अपना निशाना बनाया था. एक ऐसी कैश वैन जिसमें 22 करोड़ रुपये नकद रखे थे. वो भी नौ बक्सों में. उस दिन दोपहर 2.30 बजे का वक्त था. कहानी का आगाज़ पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी इलाके से होता है. दोपहर में एक्सिस बैंक के चेस्ट से एसआईएस सिक्योरिटी की चार गाड़ियां कुल 38 करोड़ रुपये लेकर शहर के अलग-अलग एटीएम में कैश भरने के लिए रवाना होती हैं. सभी की सभी गाड़ियों में ड्राइवर के साथ-साथ एक हथियारबंद सिक्योरिटी गार्ड भी मौजूद थे.
ड्राइवर प्रदीप शुक्ला ने रची साजिश इन्हीं गाड़ियों में से एक वैन नंबर डीएल 1के 9189 का ड्राइवर था प्रदीप कुमार शुक्ला. जबकि उसके साथ गनमैन था विनय पटेल. दोनों गाड़ी में रखे साढे 22 करोड़ रुपये लेकर ओखला के लिए रवाना हुए. लेकिन रास्ते में ही श्रीनिवासपुरी पहुंचने पर गनमैन पटेल को टॉयलेट जाने की ज़रूरत महसूस हुई. उसने शुक्ला से गाड़ी रुकवाई और बस इसी पल ड्राइवर शुक्ला ने एक ऐसी साज़िश बुन ली, जो अंजाम तक पहुंचते-पहुंचते दिल्ली की सबसे बड़ी लूट में तब्दील हो गई.
ऐसे पता चली वारदात ड्राइवर ने गनमैन से कहा कि वो गाड़ी यू टर्न कर रोड के दूसरी तरफ आ रहा है. गनमैन मना नहीं कर सका. लेकिन इसके बाद ड्राइवर शुक्ला साढे 22 करोड़ रुपये लेकर ऐसा भागा कि फिर किसी को नजर ही नहीं आया. वो तो जब लूट की खबर पुलिस तक पहुंची और मामले की जांच शुरू हुई, तब इस सबसे बड़ी कैश लूट का खुलासा हुआ.
पुलिस ने शुरू की ड्राइवर की तलाश साढे 22 करोड़ कोई मामूली रकम नहीं थी. लिहाज़ा, दिल्ली पुलिस ने सारी ताकत झोंक दी. कैश वैन की तलाश शुरू हुई. जीपीएस के ज़रिए जल्द ही पता चल गया कि वैन गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास एक पेट्रोल पंप के सामने खड़ी है. अब पुलिस फौरन वैन के पास पहुंची. लेकिन जैसा डर था वही हुआ. वैन लावारिस पड़ी थी ना ड्राइवर था और ना ही 9 बक्सों में रखे साढे 22 करोड़ रुपये. अब पुलिस ने एसआईएस के अफसरों से पूछताछ कर ड्राइवर की तलाश शुरू कर दी.
जांच में जुटी थी 21 थानों की पुलिस चूंकि मामला बहुत बड़ी लूट का था. पुलिस ने अपनी सारी ताक़त झोंक दी. साउथ ईस्ट ज़िले के सभी के सभी 21 थानों की पुलिस तो लगी ही, स्पेशल स्टाफ, एएटीएस, क्राइम ब्रांच, स्पेशल सेल जैसी तमाम इकाइयां मिशन में झोंक दी गई. लेकिन जिस तरह ड्राइवर ने एक ही सेकेंड में इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया, उससे एक साथ पुलिस की दिमाग़ में कई बातें कौंध रही थी. ये अकेले ड्राइवर का काम नहीं हो सकता. वारदात में कम से कम 4-5 लोग ज़रूर शामिल होंगे. क्योंकि इतने रुपये लूट कर अकेले उन्हें लेकर भागना आसान नहीं था. साथ ही साढे 22 करोड़ रुपए से भरे नौ बक्सों को छुपाना भी हंसी-खेल नहीं हो सकता था.

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