
दिल्ली में फिर लगेगा राष्ट्रपति शासन? केजरीवाल सरकार पर BJP के सवालों की बौछार, AAP ने लगाया साजिश का आरोप
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10 साल पहले दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा था और उस वक्त AAP ने इतिहास रच दिया था. दिल्ली में पहली बार राष्ट्रपति शासन 16 फरवरी 2014 को लगा था, तब अरविंद केजरीवाल ने सरकार बनने के 49 दिन बाद इस्तीफा दे दिया था.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) की सियासत इन दिनों चर्चा की वजह बनी हुई है. अगर दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगता है, तो आम आदमी पार्टी (AAP) की वो बात सच लगेगी जिसमें वो आरोप लगाती है कि चोर दरवाजे से बीजेपी सरकार गिराने की साजिश रह रही है. शायद तभी दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर जेल में होकर भी अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) इस्तीफा नहीं दे रहे हैं. यही वजह है कि बीजेपी दिल्ली में पॉलिसी पैरालिसिस का आरोप लगाकर राष्ट्रपति शासन की गुहार लगा दी. अब गेंद एमएचए के पाले में है. दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी पर सियासी दबाव कायम कर दिया है.
नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने AAP से पूछे ये सवाल
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने राष्ट्रपति को 30 अगस्त को दिए गए ज्ञापन में उठाये गए मुद्दों पर केजरीवाल सरकार से जवाब मांगा है. उन्होंने कहा कि हमने ज्ञापन में छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन न होने, दिल्ली की पंगु हो चुकी प्रशासनिक व्यवस्था, CAG की 11 रिपोर्ट्स को सदन में न रखने और केंद्र सरकार की योजनाओं को जानबूझकर दिल्ली में लागू न करने के मुद्दों को उठाया था, जिनका जवाब केजरीवाल सरकार को देना है.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन न कर संविधान का उल्लंघन किया है, जिसके चलते दिल्ली नगर निगम की वित्तीय स्थिति अव्यवस्थित हो चुकी है. AAP सरकार ने पिछले 5 महीने सें विधानसभा का सत्र नहीं बुलाया है. जबकि नियमानुसार पिछले सत्र के बाद 6 महीने के अंदर सत्र बुलाना अनिवार्य है लेकिन इससे से पहले सत्र बुलाया गया तो उसमें प्रश्न काल नहीं रखा गया.
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'नियमों का उल्लंघन कर रही दिल्ली सरकार'

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