
दिल्ली में प्रदूषण ने नवंबर को बनाया ‘नो-ब्रीद जोन’... 4 दिन 'बेहद खराब', तीन दिन 'घातक' रही हवा
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हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली में नवंबर के महीने में प्रदूषण चरम पर है. महीने के 19 दिनों में 14 दिन हवा ‘बहुत खराब’ और 3 दिन ‘गंभीर’ श्रेणी में रहे. सिर्फ दो दिन AQI 200 के आसपास दर्ज हुआ.
नवंबर के महीने में दिल्ली की हवा दोबारा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि 1 से 19 नवंबर तक दिल्ली में सिर्फ दो दिन ही ऐसे रहे जब हवा थोड़ी बेहतर थी. बाकी दिनों में हवा “बहुत खराब” या “गंभीर” वाली कैटेगरी में गई. बाकी तीन दिन तो स्थिति इतनी खराब थी कि एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से ऊपर, यानी सबसे गंभीर स्तर तक पहुंच गया था.
इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. ये कोई एक-दो दिन का मसला नहीं, बल्कि सालभर की गड़बड़ियों का नतीजा है. दिल्ली की सड़कों पर गाड़ियां लगातार धुआं छोड़ती हैं, जगह-जगह कचरा जलाया जाता है, फैक्ट्रियों और पावर प्लांट्स से भी हानिकारक धुआं निकलता है.
इन सबकी वजह से हवा में जहरीली गैसें और बारीक कण (PM2.5 और PM10) खूब मिल जाते हैं, जो सांस लेते वक्त सीधा हमारे फेफड़ों में चले जाते हैं और परेशानी खड़ी करते हैं.
नवंबर में तेज हुआ असर, पराली का योगदान घटा
11 से 13 नवंबर के बीच दिल्ली में हवा बेहद जहरीली और धुंधली हो गई. इस समय पराली जलाने का असर चरम पर था. हालांकि, इस साल पराली जलाने से जितना प्रदूषण हुआ, वो पिछले सालों से कम था.
2024 में पराली का कुल योगदान 22 फीसदी रहा, जबकि 2023 में ये आंकड़ा 38 फीसदी था. इसके बावजूद, दिल्ली की हवा में भारी धुंध और जहरीला धुआं फैला रहा.

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