
दिल्ली की वो सीटें, जिनके समीकरण बता रहे हैं केजरीवाल की कांग्रेस से नाराजगी की वजह?
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दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. लेकिन चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी एक तरह से कांग्रेस पर हमलावर होती नजर आ रही है. ऐसे में ये समझना जरूरी है कि इंडिया ब्लॉक में सहयोगी रही इन दोनों पार्टियों के बीच समीकरण क्यों बदलते नजर आ रहे हैं.
दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नए साल में हो जाएगा. इसमें कोई शक नहीं है कि ये चुनाव रोचक रहने वाला है लेकिन जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहा है, आम आदमी पार्टी वैसे-वैसे बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस पर हमलावर हो गई है. आम आदमी पार्टी का कहना है कि कांग्रेस के नेता AAP को सार्वजनिक मंचों से भला-बुरा कह रहे हैं और अरविंद केजरीवाल को देशद्रोही तक बता रहे हैं.
कांग्रेस के यूथ विंग ने आम आदमी पार्टी सरकार की योजनाओं को भ्रामक और धोखा देने वाला बताकर एफआईआर तक दर्ज कराने की बात कह दी है, इसलिए भी आप ने कांग्रेस को चेतावनी दे दी है. ये सारी बातें अपनी जगह लेकिन मुख्य मुद्दा कांग्रेस की वो लिस्ट लगती है जिसमें पार्टी ने आम आदमी पार्टी नेताओं के बड़े नेताओं को ही घेरने की पूरी रणनीति बना ली है. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ चुनाव लड़ रहे संदीप दीक्षित और फरहाद सूरी पर तो आप ने बीजेपी से फंड लेकर चुनाव लड़ने का आरोप तक मढ़ दिया. तो समझिए इन कुछ सीटों के बन रहे समीकरण से आम आदमी पार्टी का गुस्सा क्यों कांग्रेस पर जमकर फूटा है.
नई दिल्ली सीट (AAP के पूर्व सीएम केजरीवाल बनाम कांग्रेस के संदीप दीक्षित)
कभी शीला दीक्षित की परंपरागत सीट रही नई दिल्ली विधानसभा को अरविंद केजरीवाल ने 2013 में शीला की सियासत को खत्म करने वाली सीट बना दिया. शीला दीक्षित को दिल्ली में भ्रष्टाचार का चेहरा बनाया और केजरीवाल खुद इस सीट से मैदान में जा खड़े हुए. 15 साल सीएम रहीं शीला दीक्षित, केजरीवाल के हाथों चारों खाने चित हो गईं और कांग्रेस का दबदबा दिल्ली से खत्म हो गया. उसके बाद कांग्रेस ने किरण वालिया को 2015 तो रोमेश सब्बरवाल को 2020 में केजरीवाल के खिलाफ लड़ाया और दोनों आम आदमी पार्टी के दिग्गज के सामने बौने साबित हुए. लेकिन, कांग्रेस ने इस बार पहली ही लिस्ट में शीला दीक्षित के बेटे और पूर्वी दिल्ली से पूर्व सांसद संदीप को मैदान में उतारकर अरविंद केजरीवाल को मैसेज दिया कि ये चुनाव उनके लिए कांग्रेस के लिए आसान करने के बजाए मुश्किल करने की मंशा रखती है.
संदीप दीक्षित और दीक्षित परिवार नई दिल्ली सीट को बेहद अच्छी तरीके से पहचानते हैं. वहां के वोटरों के साथ उनका अपनापन का रिश्ता है और इसलिए संदीप दीक्षित केजरीवाल के लिए बड़ी परेशानी बन सकते हैं, खासतौर पर तब जबकि बीजेपी ने भी पश्चिमी दिल्ली के पूर्व सांसद परवेश वर्मा पर दांव खेलने का मन इस सीट से बना लिया है. इसलिए मजबूत त्रिकोणीय मुकाबले में खेल किसी ओर भी जा सकता है और इसलिए केजरीवाल खुद अपनी सीट को लेकर आश्वस्त हों ऐसा फिलहाल नहीं दिखता.
जंगपुरा सीट (AAP के पूर्व डिप्टी सीएम सिसोदिया बनाम कांग्रेस उम्मीदवार फरहाद सूरी)

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