
दिमाग का ये हिस्सा सिकुड़ा होता है साइकोपैथ्स में, एक जीन भी मिसिंग, क्या जुर्म से पहले हो सकती है संभावित हत्यारे की पहचान?
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कोलकाता में एक महिला डॉक्टर के रेप और बर्बर हत्या से पूरा देश उबल रहा है. आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड रह चुका है. हाल ही में एक और मामला आया, जिसमें बरेली के साइकोपैथ ने 13 महीनों के भीतर कई महिलाओं की हत्या कर दी. शोध कहते हैं कि पूरी प्लानिंग के साथ मर्डर करने वाले ऐसे अपराधियों का ब्रेन स्ट्रक्चर अलग होता है.
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर की हत्या और रेप करने वाले आरोपी के बारे में बताया जा रहा है कि वो आदतन क्रिमिनल था, जो शराब पीकर मारपीट करने और पोर्न देखने का भी आदी था. इससे भी बर्बर केस बरेली से आया, जहां एक सीरियल किलर ने अधेड़ उम्र की कई महिलाओं की हत्या कर दी. इसमें कातिल का दिमाग आम लोगों या गुस्से में आकर एकाएक मर्डर कर देने वालों से अलग तरह से काम करता है.
साइंस के पास भी नहीं हैं सारे जवाब
साल 1928 में सबसे पहले क्रिमिनल माइंड शब्द लिखा गया. जर्नल ऑफ एबनॉर्मल एंड सोशल साइकोलॉजी में इसका जिक्र करते हुए लिखा गया कि क्रिमिनल माइंड लोग सबसे खतरनाक होते हैं. ये एक या दो इंसानों नहीं, पूरी की पूरी इंसानियत के लिए खतरा होते हैं. इस टर्म को आए लगभग 100 साल हो चुके, लेकिन अब भी ये बात न्यूरोसाइंटिस्ट्स से लेकर मनोवैज्ञानिकों के लिए चुनौती बनी हुई है. तमाम तरक्की के बाद भी साइंस इसपर उलझा हुआ है कि क्या आदतन हत्यारों को पहले से समझा जा सकता है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एकाध लक्षण को देखकर ये कतई पता नहीं लगता कि कौन आगे चलकर खूंखार हत्यारा बन सकता है. कई बार इंसान आवेग में आकर कुछ गलत कर जाता है. बाद में उसे छिपाने की कोशिश में और गलत करता जाता है. ये कोल्ड ब्लडेड मर्डर नहीं. ऐसे लोगों को पहचानने के लिए दिमाग के स्कैन के साथ साइकोलॉजिकल थ्योरीज को भी खंगाला गया.
ब्रेन का ये भाग अलग रहता है

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