
दार्जिलिंग में गरमाया बाहरी vs स्थानीय का मुद्दा, BJP विधायक ने अपनी ही पार्टी को दी चेतावनी
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बीजेपी दार्जिलिंग लोकसभा सीट पर 2009 से जीतती आ रही है. इस क्षेत्र को पश्चिम बंगाल से अलग करने की मांग एक सदी से भी अधिक पुरानी है, गोरखालैंड राज्य आंदोलन ने 1986 में जीएनएलएफ नेता सुभाष घीसिंग के नेतृत्व में गति पकड़ी.
दार्जिलिंग हिल्स से बीजेपी विधायक बिष्णु प्रसाद शर्मा ने बुधवार को पार्टी नेतृत्व को चेतावनी दी कि अगर बीजेपी किसी बाहरी व्यक्ति को यहां से अपना उम्मीदवार बनाती है तो उन्हें आगामी लोकसभा चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. कर्सियांग के भाजपा विधायक बीपी शर्मा अलग गोरखालैंड राज्य के निर्माण के मुखर समर्थक रहे हैं. बता दें कि बीजेपी दार्जिलिंग लोकसभा सीट पर 2009 से जीतती आ रही है. हालांकि, उन्होंने लगातार ऐसे उम्मीदवारों का चयन करने के लिए भारतीय जनता पार्टी की आलोचना की जिनका दार्जिलिंग हिल्स से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा, 'वे बस आते हैं, पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं, जीतते हैं और फिर कहीं दिखते नहीं'. इस मामले पर अपना नजरिया जाहिर करते हुए बिष्णु प्रसाद शर्मा ने कहा, 'इस बार हम एक अच्छा उम्मीदवार चाहते हैं, दार्जिलिंग हिल्स का बेटा हो'.
स्थानीय मूल के व्यक्ति को टिकट देने की मांग
उन्होंने पार्टी से स्थानीय मूल के उम्मीदवार को टिकट देने का आग्रह किया और चेतावनी दी, 'यदि मांग पूरी नहीं हुई, तो मैं अपनी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ूंगा. मुझे दार्जिलिंग हिल्स की जनता की आकांक्षाओं का सम्मान करना होगा'. शर्मा की टिप्पणी के जवाब में, पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी स्थिति पर नजर रख रही है और उचित समय पर निर्णय लेगी.
उन्होंने कहा, 'पार्टी बिष्णु प्रसाद शर्मा से बात करेगी. हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं. नामांकन का मुद्दा पार्टी नेतृत्व तय करेगा और हम सभी को इसका पालन करना होगा'. दार्जिलिंग को 'पहाड़ियों की रानी' कहा जाता है. यहां के स्थानीय नेता इसे अलग गोरखालैंड राज्य बनाने की मांग को लेकर आंदोलन करते रहे हैं. उनका कहना है कि संविधान की छठी अनुसूची को लागू करते हुए, आदिवासी-बाहुल्य क्षेत्र को स्वायत्तता प्रदान की जाए.
दार्जिलिंग में चलता रहा है आंदोलनों का दौर भाजपा के साथ-साथ गोरखा जनमुक्ति मोर्चा और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट सहित पारंपरिक पहाड़ी दलों ने 2022 में अर्ध-स्वायत्त परिषद चुनावों का बहिष्कार किया था. जबकि इस क्षेत्र को पश्चिम बंगाल से अलग करने की मांग एक सदी से भी अधिक पुरानी है, गोरखालैंड राज्य आंदोलन ने 1986 में जीएनएलएफ नेता सुभाष घीसिंग के नेतृत्व में गति पकड़ी. घीसिंग के नेतृत्व में हुए आंदोलन के परिणामस्वरूप 1988 में दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल का गठन हुआ. दार्जिलिंग हिल्स को अलग गोरखालैंड राज्य बनाने की मांग को लेकर स्थानीय दलों और नेताओं ने 2017 में 104 दिनों की लंबी हड़ताल की थी.

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