
दाएं के बजाय किया बाएं पैर का ऑपरेशन, दोषी डॉक्टरों और अस्पताल को देना होगा एक करोड़ दस लाख का हर्जाना
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रवि ने अस्पताल को लीगल नोटिस भेजकर पांच करोड़ रुपए हर्जाना और मुआवजा 18 फीसद ब्याज के साथ अदा करने की मांग की. रवि के दाएं पैर की जगह बाएं पैर के ऑपरेशन की खबर मीडिया में आई तो दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने स्वत:संज्ञान लेते हुए जांच कराई और डॉक्टर्स की गलती पाते हुए उनके लाइसेंस रद्द कर दिए. दिल्ली मेडिकल कौंसिल के 30 जनवरी 2017 के आदेश को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी बरकरार रखा.
दाएं पैर के बजाय बाएं पैर का ऑपरेशन करने के दोषी दिल्ली के दो डॉक्टर्स और अस्पताल को एक करोड़ दस लाख रुपए मुआवजा देना होगा. राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण और शिकायत निवारण आयोग के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मंजूरी की मुहर लगा दी. कोर्ट ने कहा कि इस आदेश में कोई कमी या खामी नहीं है. इसमें अस्पताल 90 लाख रुपए और ऑपरेशन करने वाले व सुपर विजन करने वाले डॉक्टर दस-दस लाख रुपए भुगतान करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पामिदीघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने दोषी ठहराए गए डॉक्टर राहुल काकरान की वो अर्जी भी खारिज कर दी जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत के फैसले और पीड़ित रवि राय की अर्जी को चुनौती दी थी.
2016 में सीढ़ियों से गिर गए थे रवि राय
शालीमार बाग में रहने वाले रवि राय 19 जून 2016 को सीढ़ियों से गिर गए थे. उनके दोनों पैरों की हड्डी टूट गई थी. उन्हें फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टर राहुल काकरान की अगुआई में डॉक्टरों की टीम ने उनका मुआइना किया. उनके दाएं पैर की हड्डी ज्यादा टूटी थी जबकि बाएं पैर में हेयर लाइन फ्रैक्चर था.
डॉक्टर्स ने 21 जून को उनके बाएं पैर का ऑपरेशन कर दिया लेकिन अगले ही दिन रवि के परिवार वालों ने अस्पताल में हंगामा किया और शालीमार बाग थाने में अस्पताल और डॉक्टर राहुल काकरान और उनके जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी. इसके बाद परिजनों ने रवि को मैक्स अस्पताल में शिफ्ट कर दिया.
डॉक्टरों के लाइसेंस हुए रद्द

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