
तेल पर प्राइस कैप की चाल से तिलमिलाए पुतिन, रूस के इस फैसले से मच सकता है हाहाकार
AajTak
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तेल के उत्पादन में कटौती को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि रूस उन देशों को तेल नहीं बेचेगा, जो इस प्राइस कैप से सहमति जताएंगे या रूसी तेल की खरीद पर ईयू के प्रतिबंधों में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि अगर संभव हुआ तो हम तेल उत्पादन में कटौती पर भी सोचेंगे.
अमेरिका सहित G-7 देशों ने रूस के तेल पर प्राइस कैप लगाने का फैसला किया है. यह फैसला तेल की बिक्री से रूस को होने वाली कमाई पर चोट करने की मंशा से लिया गया. इस पर अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बेहद सख्त लहजे में कहा है कि अगर उनके तेल पर प्राइस कैप थोपी गई तो रूस किसी भी देश को तेल नहीं बेचेगा.
पुतिन ने साथ ही तेल के उत्पादन में कटौती की भी चेतावनी दी है. पुतिन ने शुक्रवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि रूस उन देशों को तेल नहीं बेचेगा, जो इस प्राइस कैप से सहमति जताएंगे या रूसी तेल की खरीद पर ईयू के प्रतिबंधों में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि अगर संभव हुआ तो हम तेल उत्पादन में कटौती पर भी सोचेंगे.
बता दें कि यूक्रेन युद्ध के बाद से ईयू के रूस पर प्रतिबंधों और प्राइस कैप को लेकर पुतिन की संभावित रूप से पहली प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है. G-7 देश रूस के तेल पर प्राइस कैप लगाने जा रहे हैं. यह प्राइस कैप प्रति बैरल 65 से 70 डॉलर तक हो सकता है. इसका साफतौर पर मतलब है कि रूस इससे सस्ते या महंगे दाम पर तेल नहीं बेच पाएगा. प्राइस कैप लागू हो जाने के बाद अगर कोई भी कंपनी इसके अनुकूल तेल नही खरीदती है, तो उस तेल के लिए कंपनियों को शिपिंग, बीमा और अन्य वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी.
तेल पर प्राइस कैप एक बेवकूफाना फैसला
पुतिन ने तेल पर प्राइस कैप को एक बेवकूफाना फैसला बताते हुए कहा कि यह वैश्विक तेल बाजारों के लिए नुकसानदायक है. पुतिन का कहना है कि इसे लागू करना सभी के लिए बेवकूफी भरा होगा. रूस पहले भी कह चुका है कि पश्चिमी देशों की ओर से लाए जाने वाला यह प्राइस कैप बाजार के सिद्धांतों के खिलाफ है.
क्या है प्राइस कैप?

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











