
तीन दशक से भी पुराना है दिल्ली का जल संकट, अब भी नहीं सुलझ पाई ये समस्या
AajTak
2012 में मुनक नहर के पूरा होने से दिल्ली और हरियाणा के बीच विवाद पैदा हो गया, जबकि दोनों राज्यों में कांग्रेस पार्टी और प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का शासन था. अनुमान था कि नई नहर के कारण दिल्ली को प्रति दिन 80-90 मिलियन गैलन (एमजीडी) अतिरिक्त पानी मिलेगा, लेकिन क्या ऐसा हुआ?
यमुना नदी के जल के बंटवारा का मुद्दा पुराना चला आ रहा है. यमुना नदी, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश, सहित विभिन्न राज्यों से होकर बहती है और इन राज्यों के लिए महत्वपूर्ण जल स्त्रोत है. इनमें से प्रत्येक राज्य की नदी के पानी के अपने हिस्से को लेकर अपनी-अपनी मांगें और चिंताएं हैं. जिसके कारण अक्सर विवाद और तनाव होते रहते हैं.
तीन दशक पहले हुआ था UYRB का गठन इन जटिल मुद्दों के समाधान के लिए, ठीक तीन दशक पहले 1994 में ऊपरी यमुना नदी बोर्ड (यूवाईआरबी) का गठन किया गया था. यह बोर्ड जल शक्ति मंत्रालय के अधीन एक अधीनस्थ कार्यालय के रूप में कार्य करता है. यूवाईआरबी का प्राथमिक अधिदेश संबंधित राज्यों के बीच यमुना के सतही प्रवाह को आवंटित करना है. बोर्ड के निर्माण का उद्देश्य जल संसाधनों का उचित और समान वितरण सुनिश्चित करना और भिन्न हितों और जरूरतों के कारण उत्पन्न होने वाले संघर्षों का प्रबंधन करना था.
तब सुप्रीम कोर्ट गया था जल संकट का मामला अब आते हैं दिल्ली के जल संकट पर जो तकरीबन 3 दशक पहले शुरू हुआ था. 1995 में, दिल्ली के निवासियों के लिए पर्याप्त जल आपूर्ति तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया था. उस समय इसके लिए प्रसिद्ध पर्यावरणविद् कमोडोर सुरेश्वर धारी सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करते हुए, सिन्हा ने संबंधित सरकारों को यमुना नदी में पानी के निरंतर प्रवाह को बनाए रखने के लिए निर्देश देने की मांग की. उनकी कार्रवाई इस गंभीर मुद्दे पर आधारित थी कि ताजेवाला हेड से पानी के कम वितरण के कारण दिल्ली के नागरिकों को पीने के पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा था.
सिन्हा ने तर्क दिया कि घरेलू उद्देश्यों के लिए पानी के अधिकार को अन्य सभी उपयोगों की जगह लेना चाहिए. उनकी वकालत में इस बात पर जोर दिया गया कि पीने के पानी की मूलभूत मानवीय आवश्यकता को कृषि, औद्योगिक या अन्य उपयोगों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उनकी याचिका मौलिक अधिकारों और पानी की आवश्यक प्रकृति के बारे में अदालत की समझ से मेल खाती थी.
1996 में एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सिन्हा की याचिका के पक्ष में फैसला सुनाया. अदालत ने फैसला सुनाया कि घरेलू उपयोग के लिए पानी का अधिकार अन्य जरूरतों पर प्रधानता रखता है. नतीजतन, दिल्ली राज्य पानी के अतिरिक्त आवंटन का हकदार था. इसके अलावा, अदालत ने निर्देश दिया कि हरियाणा को पूरे वर्ष दिल्ली को एक विशिष्ट मात्रा में पानी उपलब्ध कराना होगा. इसे लागू करने के लिए, अदालत ने आदेश दिया कि दिल्ली में वज़ीराबाद और हैदरपुर जलाशयों को हरियाणा द्वारा यमुना नदी के माध्यम से आपूर्ति किए गए पानी से उनकी क्षमता तक भरा रहना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने मौजूदा नहर प्रणाली में रिसाव को बंद करके राजधानी की बढ़ती पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए दिल्ली और हरियाणा के बीच एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की. ऐतिहासिक रूप से, दिल्ली तक यमुना का पानी पहुंचाने वाली नहर को अपनी छिद्रपूर्ण प्रकृति के कारण महत्वपूर्ण जल हानि का सामना करना पड़ा. पश्चिमी यमुना नहर प्रणाली के एक प्रमुख खंड, 102 किलोमीटर लंबे जलसेतु के निर्माण के लिए दोनों राज्यों की प्रतिबद्धता के साथ एक ऐतिहासिक समाधान सामने आया.

हाल में पाकिस्तानी के खिलाड़ियों का एक वीडियो वायरल हुआ , जहां वो कह रहे थे कि उनको ऑस्ट्रेलिया में बर्तन धोने पड़े. इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) के अध्यक्ष तारिक बुगती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. लेकिन इस मामले में पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ियों को वीडियो क्यों डिलीट करना पड़ा, इसकी वजह सामने आ गई है.

MP विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को उस समय मर्यादाएं तार-तार हो गईं, जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच तीखी बहस ने अपमानजनक मोड़ ले लिया. सदन में इस्तेमाल किए गए असंसदीय शब्दों के कारण न केवल कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी, बल्कि मुख्यमंत्री को भी मोर्चा संभालना पड़ा.

केरल स्टोरी 2 फिल्म को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. मुस्लिम पक्ष इस फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी सरकार का प्रोपेगेंडा बता रहा है. दूसरी ओर, फिल्म मेकर और सरकार के समर्थक कह रहे हैं कि जो भी घटनाएं हुई हैं, उन्हीं पर इस फिल्म की कहानी आधारित है. इसी बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस फिल्म पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.










