
तालिबान अफगान एयर फोर्स के पायलटों को चुन चुन कर क्यों मार रहा?
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तालिबान अपने ऊपर आसमान से होने वाले खतरों को कम करने के लिए पायलटों की हत्याओं को अंजाम दे रहा है. अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही तालिबान अफगानिस्तान पर कब्जा करने में जुटा है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि अगर यही हालात रहे तो राष्ट्रपति अशरफ गनी सरकार को अपना अस्तित्व बचाए रखना मुश्किल होगा.
अफगान एयर फोर्स के मेजर दस्तगीर ज़मारे ऑफ ड्यूटी पायलटों की हत्याओं से इतने भयभीत थे कि उन्होंने अपना घर बेचकर अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के सुरक्षित इलाके में रहने का फैसला किया. आम तौर पर रियल एस्टेट एजेंट घर की तलाश में आए अपने क्लाइंट का खुशी-खुशी स्वागत करते हैं. लेकिन दस्तगीर ज़मारे के साथ इसका उलट हुआ. वह आशियाने की तलाश में रियल एस्टेट एजेंट के पास पहुंचे, लेकिन जैसे ही पता चला कि जमारे वायु सेना के पायलट हैं, एजेंट फौरन अपने घर के अंदर गया और लौटकर बिना कुछ कहे उनके सिर में गोली मार दी. (फोटो-रॉयटर्स) जमारे की अपने 14 साल के बेटे के सामने मौत हो गई, जो उनके साथ ही एजेंट के पास गया था. बेटा बच गया, लेकिन परिजनों का कहना है कि वह अब बहुत कम बोलता है. उनके बहनोई समीउल्लाह दारमन ने रॉयटर्स को बताया, 'ज़मारे केवल इसलिए गए क्योंकि वह व्यक्तिगत रूप से एजेंट को जानते थे और सोच रहे थे कि उसके पास जाना सुरक्षित है. हमें नहीं पता था कि वह कभी वापस नहीं आएंगे.' (फोटो-रॉयटर्स)
वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











