
'डेमोक्रेट्स वोटिंग में ना लें हिस्सा...,' जब America में वोटर्स के पास आया President Joe Biden का डीपफेक रोबोकॉल
AajTak
अमेरिकी राज्य न्यू हैम्पशायर में मंगलवार को वोटिंग होनी है. उससे दो दिन पहले यहां वोटर्स को रोबोकॉल आने से हड़कंप मच गया है. इस फर्जी कॉल में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की तरह आवाज थी और डेमोक्रेट्स से घर पर रहने का आग्रह किया जा रहा है. यापी चुनाव में हिस्सा ना लेने की अपील की गई थी.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए साइबर अपराधी चौंकाने वाली घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. अब मंगलवार को डेमोक्रेटिक वोटर्स को एक रोबोकॉल आने से सनसनी फैल गई है. ये अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का डीपफेक कॉल था. इसमें न्यू हैम्पशायर में प्राइमरी इलेक्शन में डेमोक्रेट्स (पार्टी) के वोटर्स से घर पर रहने का आग्रह किया जा रहा था. यानी वोटिंग में हिस्सा ना लेने के लिए कहा रहा था. व्हाइट हाउस ने भी इस घटना की पुष्टि की है.
बता दें कि अमेरिका के राज्य न्यू हैम्पशायर में मंगलवार को प्राथमिक चुनाव हैं. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कैरिन जीन-पियरे ने बताया कि जाहिर तौर पर यह आगामी चुनाव 2024 के लिए एक रोबोकॉल है. इसलिए मैं बस उस टिप्पणी में सावधान रहना चाहता हूं. लेकिन वो कॉल वास्तव में एक फर्जी थी और राष्ट्रपति द्वारा रिकॉर्ड नहीं की गई थी. मैं इसकी पुष्टि कर सकता हूं. इसलिए मैं सावधान करना चाहता हूं. क्योंकि यह एक प्राइमरी चुनाव है. यह एक अभियान है. इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहता.
'राष्ट्रपति का कॉल नहीं था'
कैरिन ने आगे कहा, अधिक व्यापक रूप से जब हम डीपफेक के बारे में बात करते हैं तो राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि डीपफेक के साथ जोखिम जुड़े हुए हैं. फर्जी उभरती टेक्नोलॉजी द्वारा तस्वीरों और गलत सूचनाओं को बढ़ाया जा सकता है. इसीलिए राष्ट्रपति ने NIST में AI सुरक्षा संस्थान के माध्यम से कॉमर्स डिपार्टमेंट को स्पष्ट, वॉटरमार्किंग और कंटेंट स्टैंडर्ड को विकसित करने में मदद करने का निर्देश दिया है. लेकिन फिर से इस रोबोकॉल पर हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह राष्ट्रपति का कॉल नहीं था. यह पूरी तरह फर्जी रोबोकॉल था. इसे राष्ट्रपति की तरफ से रिकॉर्ड नहीं किया गया था.
'रोबोकॉल से पहुंचाए जाते हैं रिकॉर्ड मैसेज'
बताते चलें कि रोबोकॉल एक फोन कॉल है जो पहले से रिकॉर्ड किए गए मैसेज लोग तक पहुंचाता है. रोबोकॉल अक्सर राजनीतिक और टेलीमार्केटिंग फोन अभियानों से जुड़े होते हैं, लेकिन इसका उपयोग सार्वजनिक सेवा या इमरजेंसी घोषणाओं के लिए भी किया जा सकता है.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?







