
डीपफेक से लेकर Crime-as-a-Service तक! AI बना साइबर अपराधियों का सबसे खतरनाक हथियार, ऐसे हो रहा डिजिटल हमला
ABP News
Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने जहां दुनिया को तेज और स्मार्ट बनाया है वहीं इस तकनीक ने साइबर अपराध को भी नई ताकत दे दी है.
Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने जहां दुनिया को तेज और स्मार्ट बनाया है वहीं इस तकनीक ने साइबर अपराध को भी नई ताकत दे दी है. अब हैकिंग और ऑनलाइन ठगी छोटे स्तर की वारदात नहीं रही, बल्कि संगठित गिरोहों द्वारा बड़े पैमाने पर चलाई जा रही इंडस्ट्रियल ऑपरेशन बन चुकी है.
ग्लोबल साइबरपीस समिट 2026 में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सीईओ राजेश कुमार ने बताया कि 2024–2025 के दौरान दर्ज साइबर हमलों में AI और ऑटोमेशन का व्यापक इस्तेमाल देखने को मिला है. गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला I4C देश की एजेंसियों को साइबर अपराध से निपटने के लिए समन्वित ढांचा प्रदान करता है.
अब साइबर अपराधी किसी छोटे गैंग की तरह नहीं, बल्कि कंपनियों की तरह संगठित ढांचे में काम कर रहे हैं. दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और भारत के कुछ हिस्सों से संचालित ये नेटवर्क अलग-अलग विभागों में बंटे हुए हैं.
इन गिरोहों के पास भर्ती करने वाली टीम, वेतन और प्रमोशन देखने वाले लोग और यहां तक कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट यूनिट भी होती है. ये टीमें टेक्नोलॉजी की कमियों और इंसानी व्यवहार की कमजोरियों को खोजकर उनका फायदा उठाती हैं.













