
ट्रंप ने 4.5 अरब डॉलर की विदेशी फंडिंग पर लगाई रोक, खुद की पार्टी के सांसदों ने बताया गैरकानूनी
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस द्वारा अधिकृत 4.9 बिलियन डॉलर की फॉरेन एड रद्द कर दी है. यह कदम पॉकेट रिसेशन के तहत उठाया गया, जो कांग्रेस को दरकिनार करता है. डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने इसे गैर-कानूनी बताया, जबकि अधिकांश रिपब्लिकन खर्च में कटौती के पक्ष में हैं. इससे अमेरिकी राजनीति में बजट नियंत्रण को लेकर टकराव गहरा गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस द्वारा अधिकृत 4.9 बिलियन डॉलर की फॉरेन एड यानी विदेशों की दी जाने वाली फंडिंग को एकतरफा रद्द करने का फैसला किया है. यह कदम अमेरिकी राजनीति में इस बहस को और गहरा कर रहा है कि आखिर राष्ट्र के बजट और खर्च पर नियंत्रण किसके पास है. ट्रंप के फैसले का खुद उनकी रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने विरोध किया है और गैरकानूनी बताया है.
ट्रंप ने गुरुवार देर रात स्पीकर माइक जॉनसन को एक लेटर लिखकर बताया कि वे 15 अंतरराष्ट्रीय प्रोग्राम्स की फंडिंग रोक रहे हैं. इनमें फॉरेन एड, यूनाइटेड नेशंस की पीसकीपिंग ऑपरेशंस और लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम शामिल हैं.
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अमेरिकी संविधान के अनुसार, सरकार के खर्च को नियंत्रित करने का अधिकार कांग्रेस के पास है. व्हाइट हाउस को किसी भी राशि को रोकने के लिए कांग्रेस की अनुमति लेनी होती है. जुलाई में कांग्रेस ने 9 बिलियन डॉलर की फॉरेन एड और पब्लिक मीडिया फंडिंग को कैंसिल करने की अनुमति दी थी. लेकिन इस बार ट्रंप ने पॉकेट रिसेशन नाम के प्रावधान का इस्तेमाल किया है, जो कांग्रेस को पूरी तरह बायपास करता है.
राष्ट्रपति के पास 45 दिनों तक फंडिंग रोकने का अधिकार
व्हाइट हाउस के बजट डायरेक्टर रसेल वॉट ने दावा किया कि राष्ट्रपति 45 दिनों तक फंड को रोक सकते हैं. इस अवधि के बाद 30 सितंबर को वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाएगा. व्हाइट हाउस ने कहा कि इस तकनीक का इस्तेमाल आखिरी बार 1977 में किया गया था. संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि यह कदम उनके बजट और लिक्विडिटी पर असर डालेगा. हालांकि, वे अमेरिकी अधिकारियों से और जानकारी लेने की कोशिश करेंगे.

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

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