
'ट्रंप ने उन्हें दोस्त तो बोला लेकिन...' पीएम मोदी के दौरे के बाद क्या कह रहा अमेरिकी मीडिया
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को लेकर अमेरिकी मीडिया की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की. मोदी और ट्रंप की मीटिंग के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी हुई जिसमें पत्रकारों के अलग-अलग सवालों पर दोनों नेताओं ने जवाब दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के दौरान टैरिफ, रक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई. दोनों देश के प्रमुख नेताओं ने कई चीजों पर सहमति भी जताई और सहयोग जारी रखने की बात कही.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को लेकर अमेरिकी मीडिया की ओर से मिली-जुलीं प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
न्यूयॉर्क टाइम्स
अंग्रेजी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे एक लेख में कहा गया कि, टैरिफ मामले में 'जैसे को तैसा' नीति का ऐलान करके भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों की डगर को मुश्किल बनाने के कुछ घंटों बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्हाइट हाउस में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. लेख में कहा गया कि, नरेंद्र मोदी ऐसे राष्ट्र प्रमुख बन गए हैं जिन्होंने ट्रंप की मांगों के अनुकूल आगे बढ़ने पर बात करके उन्हें संतुष्ट किया है. व्हाइट हाउस में भी नरेंद्र मोदी ने ट्रंप की जमकर तारीफ की. यहां तक कि, मोदी ने ट्रंप के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' मोटो का भारतीय वर्जन 'मेक इंडिया ग्रेट अगेन' भी बना दिया.
न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख में आगे कहा गया कि, इस खुशामदी के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार और अवैध प्रवासन तनाव का मुद्दा है. डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एक झटका उस समय दिया, जब उन्होंने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अमेरिका का भारत के साथ 100 अरब डॉलर का घाटा है. लेख में कहा गया कि, ट्रंप ने यह आंकड़ा हालांकि बढ़ाकर बताया. साल 2024 में यह आंकड़ा करीब 50 अरब डॉलर रहा है.
नरेंद्र मोदी से मुलाकात से पहले कुछ घंटों पहले ही ट्रंप ने अपने सलाहकारों से नए टैरिफ रेट तय करने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि, जितना टैरिफ वह अमेरिका पर लगाते हैं, उतना ही अमेरिका भी लगाएगा. भारत भी उन देशों में शामिल है जो भारत के इस टैरिफ झटके से प्रभावित होंगे.

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.







