
ट्रंप के हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग, लंदन से लौटते वक्त आई तकनीकी खराबी
AajTak
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिटेन के दो दिवसीय दौरे परे थे. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री स्टार्मर से मुलाकात की. उससे पहले वह किंग चार्ल्स तृतीय द्वारा आयोजित राजकीय भोज में भी शामिल हुए.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग का मामला सामने आया है. यह घटना लंदन के पास ल्यूटन एयरफील्ड के पास की है. इस दौरान उनके साथ फर्स्ट लेडी मेलानिया भी थीं.
राष्ट्रपति ट्रंप को चेकर्स से लंदन के स्टैनस्टेड एयरपोर्ट जाना था लेकिन रास्ते में ल्यूटन एयरपोर्ट पर उनके हेलिकॉप्टर मरीन वन को इमरजेंसी में लैंड कराना पड़ा. उनके हेलिकॉप्टर में हाइड्रोलिक की समस्या थी, जिस वजह से उन्हें एयरपोर्ट से दूसरे हेलिकॉप्टर के जरिए स्टैनस्टेड भेजा गया, जहां से वह अमेरिका के लिए रवाना हुए.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ब्रिटेन के अपने दूसरे राजकीय दौरे पर थे. उन्होंने यहां ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से चेकर्स में मुलाकात कही, जहां उन्होंने यूक्रेन, गाजा और अवैध प्रवासन जैसे मुद्दों पर चर्चा की. दोनों नेताओं ने एक नई टेक्नोलॉजी डील भी की, जिसमें अमेरिकी कंपनियां यूके में 150 अरब पाउंड का निवेश करेंगी.
इस मुलाकात के बाद ट्रंप दंपति अमेरिका लौटने के लिए स्टैनस्टेड एयरपोर्ट जा रहे थे, जहां से वे एयर फोर्स वन पर सवार होने वाले थे. इस दौरान मरीन वन हेलिकॉप्टर में उड़ान के दौरान हाइड्रोलिक दिक्कत आई. पायलट्स ने सावधानी के तौर पर स्टैनस्टेड पहुंचने से पहले पास के ल्यूटन एयरफील्ड पर इमरजेंसी लैंडिंग की. यह यात्रा मूल रूप से 20 मिनट की थी, लेकिन इस वजह से लगभग 40 मिनट लग गए. इस दौरान ट्रंप और मेलानिया को सुरक्षित उतारा गया और वे तुरंत एक बैकअप सपोर्ट हेलिकॉप्टर में शिफ्ट हो गए, जो उन्हें स्टैनस्टेड ले गया. वहां से वे एयर फोर्स वन पर सवार होकर वाशिंगटन लौटे.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.







