
ट्रंप के शासन में कैसे होंगे अमेरिका-भारत के संबंध, फरीद जकारिया ने समझाया
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जकारिया ने भविष्यवाणी की कि ट्रंप और मोदी की नीति का मेल दोनों देशों को और करीब लाएगा. उन्होंने कहा,
प्रसिद्ध पत्रकार और भू-राजनीतिक विशेषज्ञ फरीद जकारिया ने सोमवार को ट्रंप शासनकाल के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा पर सकारात्मक रुख जताया. उन्होंने इसे भारत के लिए "स्वर्णिम अवसर" करार दिया, जो चीन के विनिर्माण क्षेत्र के प्रभुत्व को चुनौती देने और खुद को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक हो सकता है.
भारत-अमेरिका संबंधों का स्थायित्व इंडिया टुडे टीवी के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल के साथ एक साक्षात्कार में जकारिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशंसा और दोनों देशों के बीच संबंधों में लगातार बढ़ती मजबूती इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका साझेदारी और गहरी होगी. उन्होंने कहा, "ट्रंप ने हमेशा कहा कि उन्हें मोदी पसंद हैं. मुझे लगता है कि भारत के प्रति अमेरिकी नीति में निरंतरता बनी रहेगी. बिल क्लिंटन से लेकर जो बाइडेन तक, पिछले 25 वर्षों में अमेरिका ने भारत के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत किया है."
चीन पर निर्भरता घटाने का अवसर जकारिया ने भविष्यवाणी की कि ट्रंप और मोदी की नीति का मेल दोनों देशों को और करीब लाएगा. उन्होंने कहा, "हम आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों में प्रगति और एशिया में चीन पर निर्भरता को कम करने की दिशा में ठोस कदम देख सकते हैं. यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है कि वह एशिया में अपने प्रभाव को बढ़ाए."
चीन के खिलाफ ट्रंप की नीति और भारत का लाभ चीन को लेकर ट्रंप की आक्रामक रणनीति पर चर्चा करते हुए जकारिया ने कहा कि चीन पर 60% निर्यात शुल्क लगाने जैसे कदम भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. उन्होंने कहा, "अमेरिका के व्यवसाय पहले ही चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की प्रक्रिया में हैं. ट्रंप प्रशासन ने यह संकेत दिया है कि वह चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों पर फिर से विचार करेगा."
जकारिया ने बताया कि मैक्सिको, वियतनाम और मलेशिया जैसे छोटे देश इस बदलाव का लाभ उठा रहे हैं, लेकिन भारत ने अभी तक अपने आप को एक मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित नहीं किया है. उन्होंने कहा, "अगर अमेरिकी व्यवसाय चीन से अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को हटाते हैं, तो छोटे देश पूरी मांग को पूरा नहीं कर पाएंगे. केवल भारत के पास इतना बड़ा पैमाना और क्षमता है कि वह इस स्थान को भर सके."
भारत के लिए "स्वर्णिम अवसर" जकारिया ने भारत के पास मौजूद इस अनूठे अवसर पर जोर देते हुए कहा कि अगर भारत अपनी नीतियों को सही दिशा में ले जाए, तो वह अमेरिकी व्यवसायों की आपूर्ति श्रृंखलाओं का मुख्य केंद्र बन सकता है. उन्होंने कहा, "भारत को चाहिए कि वह निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करे और विनिर्माण क्षेत्र को प्राथमिकता दे. इससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है."

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