
ट्रंप का घर बना Elon Musk का नया ठिकाना, क्यों दुनिया के सबसे अमीर इस शख्स ने बेच दी अपनी सारी अचल प्रॉपर्टी?
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एलन मस्क कई बार कह चुके कि उनके पास अपना कोई घर नहीं, बल्कि वे अपने किसी दोस्त या परिचित के घर रात बिताते हैं. फिलहाल अमेरिका के प्रेसिडेंट इलेक्ट डोनाल्ड ट्रंप का घर उनका ठिकाना है. वे फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो के एक कमरे में ठहरे हुए हैं. मस्क अकेले नहीं, बहुत से बेहद अमीर लोग अपना घर लेने से बचते रहे, या फिर घर बनाया भी तो आम लोगों की तरह.
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति चुने जा चुके. जीत के बाद दी स्पीच में उन्होंने खुद एलन मस्क का नाम लेते हुए उन्हें अपना सबसे बड़ा सहयोगी और फंडर बताया. दोनों के बीच वर्क केमेस्ट्री कुछ ऐसी है कि मस्क फिलहाल फ्लोरिडा स्थित ट्रंप के घर पर ही रह रहे हैं. मस्क पहले भी कई बार बता चुके कि उनका अपना कोई परमानेंट घर नहीं है, बल्कि वे दोस्तों के घर या दफ्तर में ही रात गुजारते हैं. दुनिया के कई सबसे अमीर लोग इसी श्रेणी में हैं, जो अपना स्थाई ठौर बनाने से बचते रहे.
लगभग पांच साल पहले बेची अचल संपत्ति
मस्क शुरुआत से ऐसे नहीं थे, बल्कि साल 2020 से पहले उनके पास बहुत से शानदार घर और एस्टेट हुआ करते थे. उसी साल उन्होंने अपनी सारी अचल संपत्ति बेचने का एलान कर दिया, जिसमें गाड़ियों से लेकर तमाम घर भी शामिल थे. मस्क का कहना था कि वे अपनी सारी प्रॉपर्टी से आए फंड का इस्तेमाल मंगल पर कॉलोनी बसाने में करेंगे. लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई. कुछ समय बाद कई सारे इंटरव्यूज में उन्होंने एक टर्म इस्तेमाल किया- मिनिमलिज्म. इसका मतलब है, कम से कम सामान में गुजारा करना. जरूरी नहीं कि मिनिमलिस्ट के पास घर न हो. उसके पास संपत्ति हो सकती है, लेकिन न्यूनतम. घर पर भी भारी-भरकम फर्निचर या टीवी जैसी चीजों के लिए कोई जगह नहीं होगी.
संपत्ति बेचने के बाद मस्क दफ्तर या दोस्तों के घर रहने लगे. कुछ महीनों बाद वे ठिकाना बदल देते. फिलहाल आपसी जरूरत की वजह से वे ट्रंप के घर पर ठहरे हुए हैं.
मिनिमलिज्म का कंसेप्ट काफी पुराना है 20वीं सदी में लड़ाइयों के बाद लोगों में इसकी उलट आदत दिखने लगी. पहले नियत राशन और कम ही चल-अचल संपत्ति जोड़ी जाती थी. युद्ध के बाद लोगों के सोचने का तरीका बदला. वे ज्यादा से ज्यादा जमा करने की सोचने लगे, चाहे वो राशन हो, या कीमती चीजें. उन्हें लगता था कि फिर लड़ाई छिड़ी तो सेफ जगह पर भागने और दोबारा बसने में ये दौलत उनकी मदद कर सकेगी. जमा करने की आदत इतनी बढ़ने लगी कि उसे रोकने के लिए ही एक आंदोलन चल निकला, मिनिमलिज्म का. न्यूयॉर्क में आर्ट गैलरियों से शुरू कैंपेन लोगों के घरों तक पहुंचने लगा. लोगों ने सबसे पहले अपने घरों से दरवाजे सिंपल डिजाइन के बनाने शुरू किए, इसके पास ये सादगी हर जगह दिखने लगी.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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