
झारखंड में अगले पांच साल में 25–30 नए मेडिकल कॉलेज, सीएम हेमंत सोरेन का ऐलान
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ऐलान किया है कि राज्य सरकार अगले पांच सालों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 25–30 तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. सेराइकेला-खरसावां के आदित्यपुर में एक निजी मेडिकल कॉलेज के पहले एमबीबीएस बैच की शुरुआत के मौके पर उन्होंने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई.
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य सरकार अगले पांच सालों में झारखंड में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाकर 25 से 30 तक करने की दिशा में काम कर रही है.
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह बात आदित्यपुर में एक निजी मेडिकल कॉलेज के पहले एमबीबीएस बैच की कक्षाओं के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रही है, जिससे न सिर्फ गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध हो, बल्कि आम जनता को आधुनिक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी मिल सकें.
मुख्यमंत्री ने कहा, 'हम अगले पांच सालों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 25 से 30 तक ले जाने की ओर लगातार आगे बढ़ रहे हैं. फिलहाल झारखंड में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर करीब 12 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं. ऐसे में यह लक्ष्य हासिल करना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस दिशा में काम कर रही है.
हेमंत सोरेन ने स्वीकार किया है कि इस लक्ष्य को हासिल करने में कई तरह की चुनौतियां हैं, जैसे आधारभूत संरचना, योग्य फैकल्टी की उपलब्धता और संसाधनों का विस्तार. बावजूद इसके उन्होंने कहा कि चुनौतियों के बीच काम करना उन्हें प्रेरणा देता है. मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए हर स्तर पर गंभीर प्रयास कर रही है.
उन्होंने कहा कि छोटे जिलों में मेडिकल कॉलेज की स्थापना न केवल स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा के नए अवसर खोलती है, बल्कि आसपास के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी सुदृढ़ बनाती है. मुख्यमंत्री ने सेराइकेला-खरसावां जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत को सराहनीय बताया और इसे संतुलित क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक अहम कदम करार दिया.
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में राज्य के दूरदराज और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भी मेडिकल और स्वास्थ्य संस्थानों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि लोगों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े.

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