
झारखंड भी एनडीए-मय? बीजेपी और हेमंत सोरेन कैसे एक दूसरे की जरूरत बन रहे हैं
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झारखंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने की खबरें लगातार आ रही हैं. खबरें भाजपा और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की नजदीकियों को लेकर. कांग्रेस की ओर से इस तरह की खबरों पर विराम लगाने के लिए बयान भी आया. पर जेएमएम की ओर से केवल एक क्रिप्टिक पोस्ट ही आई. मतलब यहां अब भी बहुत कुछ उलझा हुआ है.
झारखंड मुक्ति मोर्चा के एनडीए में शामिल होने की खबरें पिछले एक हफ्ते से लगातार चर्चा में हैं. दिल्ली से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रांची वापसी हो चुकी है. कांग्रेस पार्टी ने भी इंडिया ब्लॉक में किसी भी तरह के खटपट से इनकार किया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा की एक सांसद महुआ माजी ने भी इस तरह की किसी भी खबर से इनकार किया है. पर इतिहास बताता है कि इस तरह की घटनाएं जब होती हैं तो किसी को बता के नहीं होती हैं. वैसे भी राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता. हेमंत सोरेन के लिए एनडीए में आने की राह मजबूरी से ज्यादा रणनीतिक भी हो सकता है. उसी तरह बीजेपी के लिए भी हेमंत सोरेन भविष्य की रणनीति का आधार हो सकते हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिल्ली यात्रा और बीजेपी नेताओं से कथित बैकचैनल बातचीत की खबरों ने एनडीए में जेएमएम को शामिल करने की अफवाहों को हवा दी है. जबकि जेएमएम ने सोशल मीडिया पर 'झुकेगा नहीं' जैसे क्रिप्टिक संदेश जारी किए हैं. जाहिर है कि अभी कुछ कहा नहीं जा सकता . फिर भी हम आंकलन तो कर ही सकते हैं कि धुआं क्यों उठ रहा है? जाहिर है कि जरूरत दोनों ही ओर से है. और जब जरूरत होती है तो उसी के हिसाब चीजें बदलती भी हैं.
हेमंत सोरेन की NDA में जाने की मजबूरियां हैं
जेएमएम का आदिवासी आधार मजबूत है, लेकिन केंद्र का दबाव और आंतरिक चुनौतियां उन्हें नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर रही हैं.
1-कानूनी और जांच एजेंसियों से अस्तित्व की रक्षा
हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर जांच एजेंसियों के साये में रहा है. 2022-23 में मनी लॉन्ड्रिंग और खनन घोटाले के आरोपों में उनकी जनवरी 2024 में गिरफ्तारी हुई. ईडी-सीबीआई की जांच आज भी चल रही हैं.अगर जेएमएम इंडिया गठबंधन में बनी रहती है, तो ये केस तेज हो सकते हैं, जाहिर है कि इससे सरकार की अस्थिरता का खतरा होगा.

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