
जॉर्जिया: जब रिपोर्टर्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया सरकार का विरोध, हिंसा में हुई थी साथी पत्रकार की मौत
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सोशल मीडिया पर एक वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है. जहां जॉर्जिया सरकार के प्रतिनिधि द्वारा की जा रही प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल पत्रकारों ने अपना विरोध दर्ज करवाया और प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगा.
जॉर्जिया (Georgia ) में बीते दिनों LGBTQ के समर्थन में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद से ही बवाल जारी है. इस हिंसा में कई पत्रकारों (Journalists) को पीटा गया था, जबकि एक पत्रकार की मौत भी हो गई थी. इसी को लेकर जॉर्जिया के कई टीवी चैनल और पत्रकारों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. Journalists interrupt Government press briefing with protest Journalists demand PM Irakli #Garibashvili's resignation over the death of journalist Aleksandre #Lashkarava and mass violence of July 5 which they say he incited with the morning statement on that day#TbilisiPogrom pic.twitter.com/SlrYfSI2WH
वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











