
जेल में इमरान, राजपक्षे का राज ओवर, शरण में हसीना और गनी... कहां है दक्षिण एशिया का विस्थापित पॉलिटिकल एलीट?
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अफगानिस्तान, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश के बाद नेपाल का भी राजनीतिक नेतृत्व निर्वासन की राह पर है. दक्षिण एशिया के इन देशों की राजनीति में पिछले कुछ सालों उथल-पुथल मची है. कभी अपने देशों में शीर्ष पदों पर विराजमान रहने वाले अशरफ गनी, इमरान खान, शेख हसीना और राजपक्षे जैसे पॉलिटिकल एलीट अब गुमनामी के अंधेरे में हैं.
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर को इस्तीफा दे दिया क्योंकि सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे.
सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध हटाने की घोषणा के बावजूद नेपाल में अगले दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रहे.
ओली के इस्तीफे के साथ ही नेपाल भारत का कम से कम तीसरा पड़ोसी देश बन गया है, जो युवाओं के नेतृत्व में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद 2022 के बाद से महत्वपूर्ण राजनीतिक परिवर्तन से गुजर रहा है.
बांग्लादेश में भी असंतोष की ऐसी ही लहर देखी गई, जहां जुलाई 2024 में ढाका में छात्रों के नेतृत्व में प्रदर्शन हुए. 1971 के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों को लाभ पहुंचाने वाली विवादास्पद नौकरी कोटा प्रणाली के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जल्द ही जनता की हताशा की व्यापक अभिव्यक्ति में बदल गया.
तख्तापलट के बाद फरार हुए नेताओं की वर्तमान गतिविधियों और ठिकानों पर एक नजर डालें.
श्रीलंका: राजपक्षे सिंगापुर भागे, अब कोलंबो में हैं

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