
जिन रबीन्द्रनाथ टैगोर ने लिखा बांग्लादेश का राष्ट्रगान, उन्हीं की हवेली को दंगाइयों ने बांग्लादेश में तोड़ डाला!
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टैगोर परिवार के पास बांग्लादेश में स्थित कचहरीबाड़ी में जमींदारी थी और रबीन्द्रनाथ ने 1890 के दशक में यहां रहते हुए अपने पिता की जमींदारी का प्रबंधन किया और साथ ही साथ साहित्यिक रचनाएं की. लेकिन दंगाइयों ने एक मामूली बात पर टैगोर की हवेली में मौजूद संग्रहालय को ही तोड़ डाला.
बांग्लादेश में रबीन्द्रनाथ टैगोर के पुराने घर को दंगाइयों ने तोड़ डाला है. रबीन्द्रनाथ टैगोर का ये वही घर है जहां पर उन्होंने कई विश्व प्रसिद्ध रचनाएं को अपनी लेखनी से कागज पर उतारा है. अत्यंत हैरानी की बात यह है कि साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रबीन्द्रनाथ टैगोर की एक रचना ‘आमार सोनार बांग्ला’ ही बांग्लादेश में राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार की गई है.
लेकिन दंगाइयों ने अब उन्हीं रबीन्द्रनाथ टैगोर के घर को तोड़ डाला है जिन्होंने उनके देश का राष्ट्रगान लिखा था.
बुधवार को मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बांग्लादेश के सिराजगंज जिले में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर पर भीड़ ने हमला किया और तोड़फोड़ की, जिसके बाद अधिकारियों ने घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है.
घटना के अनुसार 8 जून को एक व्यक्ति अपने परिवार के साथ सिराजगंज के कचहरीबाड़ी में स्थित रबीन्द्रनाथ टैगोर म्यूजियम में घुमने आया था. इस जगह को रबींद्र कचहरीबाड़ी भी कहा जाता है.
🔸 Rabindranath Tagore’s ancestral house was vandalised in Sirajganj district of Bangladesh. That's how the Greatest poet of Bengal is respected by Bengali muslims. pic.twitter.com/uOa3UtVEgw
यहां इस शख्स की मोटरसाइकिल पार्किंग फीस को लेकर इस जगह की देखरेख कर रहे लोगों के साथ बहस हो गई. बाद इस शख्स को कथित एक शख्स में बंद कर दिया गया और इसके साथ मारपीट की गई.

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