
जानें बीजेपी संसदीय बोर्ड की पावर, जिससे बाहर किए गए गडकरी और शिवराज
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बीजेपी अध्यक्ष जय प्रकाश नड्डा ने पार्टी के संसदीय बोर्ड का गठन कर लिया है. इस बार बड़ा बदलाव नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान का इसमें नाम ना होना है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीजेपी का संसदीय बोर्ड काम कैसे करता है. क्या-क्या काम उसके हिस्से आता है और पार्टी में निर्णय लेने को लेकर इसकी पावर कितनी होती है?
अमित शाह के सियासी उत्तराधिकारी के तौर पर जेपी नड्डा ने बीजेपी की कमान तो काफी पहले संभाल ली थी, लेकिन पार्टी के संसदीय बोर्ड का गठन अब हुआ है. बीजेपी की ओर से नए संसदीय बोर्ड और केन्द्रीय चुनाव समिति का एलान कर दिया गया है. खास बात ये है कि इन दोनों समितियों से केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छुट्टी कर दी गई है तो शाहनवाज हुसैन को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है.
बीजेपी संसदीय बोर्ड का गठन
बीजेपी में आठ साल बाद पार्टी के संसदीय बोर्ड का गठन किया गया है. संसदीय बोर्ड में पार्टी अध्यक्ष के अलावा 10 सदस्य शामिल किए गए हैं. इनमें नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, बीएस येदयुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया और बीएल संतोष (सचिव) शामिल हैं.
2014 में अमित शाह ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभाली थी, तब उन्होंने संसदीय बोर्ड का गठन किया था. इसमें नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, थावर चंद गहलोत, शिवराज सिंह चौहान, बीएल संतोष शामिल थे. इसके अलावा अरुण जेटली, अनंत कुमार, सुषमा स्वराज भी सदस्य थे, जिनका निधन हो जाने से तीन जगहें खाली थीं. वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति और थावरचंद गहलोत के राज्यपाल बनने से उनकी जगह भी खाली थी.
अब जब संसदीय बोर्ड का फिर से गठन किया गया है, तो नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान को जगह नहीं मिली है. इनकी जगह, बीएस येदयुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव और सत्यनारायण जटिया को नए चेहरे को तौर पर संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया है.
बीजेपी संसदीय बोर्ड का काम

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