
जानिए चुनाव आयुक्तों के चयन का क्या है प्रोसेस, कौन करता है नाम की सिफारिश, नया सिस्टम-पुराना सिस्टम क्या है? बड़े सवालों के जवाब
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चुनाव आयुक्तों के खाली पद भरने के लिए केंद्र सरकार ने प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है. सर्च कमेटी ने दोनों पदों के लिए पांचों नामों को शॉर्ट लिस्ट किया है और इसकी सिफारिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय चयन कमेटी को भेजी है. आज पीएम के नेतृत्व में चयन कमेटी इन नामों पर विचार करेगी और दो नामों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजेगी.
लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से ठीक पहले चुनाव आयुक्त के दो पदों को भरने की कवायद तेज हो गई है. कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की अध्यक्षता वाली एक सर्च कमेटी ने चुनाव आयोग में दोनों रिक्तियों को भरने के लिए पांच कैंडिडेट्स का एक पैनल तैयार करने के लिए बुधवार शाम को बैठक की. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन कमेटी दो कैंडिडेट्स के नामों को फाइनल करने के लिए आज दोपहर बैठक करेगी. चयन कमेटी की सिफारिश के आधार पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नियुक्ति पर अंतिम मुहर लगाएंगी. फिलहाल, अधिसूचना जारी होने के बाद नए कानून के तहत यह पहली नियुक्तियां होंगी. आइए जानते हैं नए कानून के तहत चुनाव आयुक्तों के चयन से लेकर नियुक्ति की प्रोसेस क्या है?
बता दें कि अनूप चंद्र पांडे 14 फरवरी को रिटायर हो गए हैं. इस बीच, 8 मार्च को अरुण गोयल ने अचानक पद से इस्तीफा दे दिया है. जिसके बाद चुनाव आयुक्त (EC) के दोनों पद खाली हो गए हैं और अब इन पदों को भरने की कवायद की जा रही है. गोयल का इस्तीफा 9 मार्च को अधिसूचित किया गया था. चुनाव आयोग में सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार एकमात्र सदस्य रह गए हैं.
क्या होता है चुनाव आयोग, क्या होती है पावर?
संविधान के अनुच्छेद-324 में चुनाव आयोग के बारे में जिक्र किया गया है. देश में केंद्रीय चुनाव आयोग है, फिर हर प्रदेश के लिए राज्य चुनाव आयोग होते हैं. इनमें भी एक मुख्य चुनाव आयुक्त होता है. चुनाव आयोग ही लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा से लेकर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए जिम्मेदार संस्था है. सबसे बड़ा अधिकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) होता है और उनके अंडर में चुनाव आयुक्त (EC) होते हैं. लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव का ऐलान होने के बाद आचार संहिता लागू होती है और फिर पूरे प्रशासनिक मशीनरी की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के हाथों में आ जाती है. ट्रांसफर से लेकर पोस्टिंग तक चुनाव आयोग के आदेश पर होती है. राज्य में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं.
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अनुच्छेद 324 में नियुक्तियों के लिए क्या प्रावधान?

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