
जयपुर में पैंथर और पिटबुल की भिड़ंत LIVE, फिर तेंदुए का हुआ जो हाल...
AajTak
तेंदुए ने आते ही सबसे पहले पिटबुल पर झपट्टा मारा लेकिन जवाब में पिटबुल भी उससे भिड़ गया. काफी देर तक दोनों में दो-दो हाथ हुआ और फिर कुत्ते ने तेंदुए को ओंधे मुंह जमीन पर पटक दिया. इसके बाद महज 10 सेकेंड में ही तेंदुए को जान बचाकर वापस जंगल की तरफ भाग खड़ा हुआ.
जयपुर में शिकार के लिए आबादी क्षेत्र में घुसे तेंदुए को एक कुत्ते ने वापस उल्टे पांव भगा दिया. काफी देर तक तेंदुए और कुत्ते के बीच जमकर संघर्ष हुआ लेकिन कुत्ते ने हार नहीं मानी. हालांकि लड़ाई में पालतू जानवर जख्मी जरूर हुआ लेकिन वो जंगली तेंदुए पर इस कदर भारी पड़ा कि आखिरकार तेंदुए को ही भागना पड़ गया.
यह पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गया, जिसे देखकर हर कोई हैरान है. घटना जयसिंहपुरा खोर इलाके के मानबाग की है, जहां बीते शुक्रवार तड़के करीब 4.15 बजे भेरुजी मंदिर परिसर में एक तेंदुआ घुस गया. मंदिर परिसर में ही पुजारी का परिवार रहता है. उन्होंने घर की रखवाली के लिए एक पिटबुल कुत्ता रखा हुआ है.
तेंदुए को भागना पड़ा वापस
तेंदुए ने आते ही सबसे पहले पिटबुल पर झपट्टा मारा लेकिन जवाब में पिटबुल भी उससे भिड़ गया. काफी देर तक दोनों में दो-दो हाथ हुआ और फिर कुत्ते ने तेंदुए को ओंधे मुंह जमीन पर पटक दिया. इसके बाद महज 10 सेकेंड में ही तेंदुए को जान बचाकर वापस जंगल की तरफ भाग खड़ा हुआ.
कुत्ते ने नहीं मानी हार
हालांकि जान की बाजी लगाने वाला बहादुर पिटबुल जख्मी जरूर हुआ लेकिन उसने भी आखिर तक हार नहीं मानी. मंदिर परिसर में रहने वाले योगेश पुरी ने बताया कि कई बार तेंदुए जंगल से आबादी क्षेत्र की ओर आ जाते हैं और मंदिर के आस-पास भी मूवमेंट हुआ है. इसी को देखते हुए परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे.

Tata Punch EV Facelift: टाटा मोटर्स ने अपनी सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक एसयूवी पंच ईवी के नए फेसलिफ्ट मॉडल को लॉन्च किया है. इस इलेक्ट्रिक कार को लेकर कंपनी का दावा है कि, ये कार सिंगल चार्ज में 468 किमी तक की ड्राइविंग रेंज देगी और डीसी फास्ट चार्जर की मदद से इसकी बैटरी केवल 26 मिनट में ही 80% तक चार्ज हो जाएगी.

सैकड़ों साल पहले तबाह हो चुके एक रोमन शहर की दीवार पर करीब 2000 साल पुराने लव लेटर्स लिखे हुए मिले हैं. यह खोज आज की उन्नत और आधुनिक तकनीक का नतीजा है. क्योंकि, जिस दीवार पर ये ग्रैफिटी बने थे, वो काफी पहले खुदाई में मिल गए थे, लेकिन उन पर उकेरे गए भित्तिचित्रों को समझना मुश्किल था. अब जाकर पुरातत्वविदों को इसका मतलब पता चला है.











