
जब पूरे 444 दिनों तक इस्लामिक चरमपंथियों की कैद में रहे अमेरिकी, क्या हमास ने ईरान की शह पर लोगों को बंधक बनाया
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हमास ने इजरायल के करीब 2 सौ लोगों को बंदी बना लिया. इसके बाद से दोनों के बीच घमासान मचा हुआ है. बंधक बनाने की इस हरकत को ईरान से जोड़ा जा रहा है. साल 1979 में दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका 444 दिनों तक ईरान के चंगुल में रहा. यहां तक कि अपहृत अमेरिकियों की आंखों पर पट्टी बांधकर परेड भी कराई गई थी.
अमेरिका के साथ ईरान के रिश्ते आड़े-टेढ़े रहे. सत्तर के दशक से पहले दोनों के बीच गहरा प्रेम रहा. यहां तक कि अमेरिकी सहयोग से इजरायल के हथियार भी ईरान तक सप्लाई होने लगे. लेकिन इस्लामिक क्रांति के बाद मामला बिगड़ता चला गया. ईरानी नेता अयातुल्लाह खुमैनी ने सत्ता संभाल ली. वे अपने देश समेत पूरी दुनिया को इस्लामिक रंग में रंगना चाहते थे. इसी बात को लेकर अमेरिका से उसकी ठनने लगी.
ऐसे भरा आम जनता के दिल में जहर
ये तो नेताओं के आपसी बैर की बात थी, धीरे से इसमें आम लोगों की नाराजगी भी शामिल हो गई. ईरान के पुराने लीडर देश छोड़-छोड़कर अमेरिका जा रहे थे. कोई इलाज के बहाने से तो कोई परिवार के बहाने से यूएस जाने लगा. इस्लामिक चरमपंथ ने इस बात को लोगों के दिमाग में भरना शुरू कर दिया. खुमैनी ने कहा कि ज्यादा उदार लीडरशिप देश को बेकार कर देती है. बात का असर हुआ.
शुरू हुआ हैरतअंगेज घटनाओं का सिलसिला नवंबर 1979 में तेहरान के इस्लामी छात्रों ने अमेरिकी एंबेसी को घेरकर वहां के लोगों को बंधक बना लिया. कुछ ही घंटों बाद ये घेराबंदी हटा ली गई, लेकिन 53 लोग बंधक ही रहे. इसमें दूतावास में काम करने वाले कर्मचारियों से लेकर डिप्लोमेट तक शामिल थे. पकड़कर ले जाने से पहले आंखों पर पट्टी बांधकर इन लोगों की परेड भी कराई गई, जिस दौरान अमेरिका मुर्दाबाद जैसे नारे लग रहे थे.
अमेरिका ने दी ईरान को बड़ी धमकी

होर्मुज में तेल और गैस पर ईरान ने जो रोक लगा रखी है, उसकी सुरक्षा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मित्र देशों से युद्धपोत भेजने की गुहार लगाई है. लेकिन फ्रांस, जापान, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया, यगां तक की यूके ने भी कहां वो अभी इसपर विचार विमर्श कर रहे है.

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