
जब टैबू तोड़कर 'जॉयनिस्ट स्टेट' इजरायल के दौरे पर गए थे पश्चिम बंगाल के कम्युनिस्ट CM ज्योति बाबू!
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इजरायल का विरोध भारत की कम्युनिस्ट पार्टी आज भी करती है. लेकिन मौजूदा सीपीएम महासचिव एम ए बेबी अपने पूर्ववर्ती नेता ज्योति बसु को लेकर क्या कहेंगे, जिन्होंने एक रेडिकल फैसला लेते हुए इजरायल का दौरा किया था और इस यहूदी स्टेट की खुलकर तारीफ की थी. खास बात यह भी है कि फिलिस्तीन के नेता यासिर अराफात उनके पक्के दोस्त थे.
“वो पुराने दिन थे जब हम साउथ अफ्रीका और इज़रायल की सरकारों का विरोध करते थे. लेकिन अब हमारी पॉलिसी बदल गई है. यहां तक कि इंडियन फॉरेन पॉलिसी भी बदल गई है और इन दोनों देशों के साथ पूरे डिप्लोमैटिक रिलेशन हैं." 25 साल पहले जब पश्चिम बंगाल के सीएम और भारत में कम्युनिस्ट विचारधारा के स्तंभ रहे कॉमरेड ज्योति बसु जब इजरायल की यात्रा पर गए थे तो उन्हें कई तर्क गढ़ने पड़े थे. उनकी पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया इजरायल और इजरायल को गढ़ने वाली विचारधारा की कट्टर विरोधी थी.
लेकिन देश-दुनिया की हवा पहचानने वाले और 23 वर्षों तक बंगाल के सीएम रहने वाले ज्योति बसु समझ गए थे इजरायल विज्ञान और आविष्कार की दुनिया आने वाले दिनों में क्या करने वाला है.
राजनीतिक टैबू तोड़ने का साहसिक फैसला
इसलिए उन्होंने उस राजनीतिक टैबू को तोड़ने का निर्णय किया, जिसकी हिम्मत कम ही नेता कर पाते हैं. जून 2000 में सीएम ज्योति बसु एक बड़े बिजनेस प्रतिनिधिमंडल के साथ इजरायल दौरे पर पहुंचे थे.
लेकिन ज्योति बसु कोई हठात इजरायल नहीं पहुंच गए थे. अपने दौरे से 2 साल पहले 1998 में उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (CPI) के नेता और उस समय वेस्ट बंगाल इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन सोमनाथ चटर्जी को इज़रायल भेजा था.
बसु के इजरायल जाने और उस देश के साथ व्यापार करने के फैसले से कई सवाल उठे थे. पार्टी के अंदरुनी खेमे में दबी जुबान उनकी आलोचना भी हुई थी. लेकिन उस समय की कम्युनिस्ट पार्टी ने इसे व्यावहारिक और बिजनेस डील बताया.

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