
जज की किताब, पृथ्वीराज चौहान का जिक्र और शिवलिंग का दावा...अजमेर दरगाह में शिव मंदिर पर क्या हैं दोनों पक्षों के दावे
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यूपी के संभल में मस्जिद को लेकर विवाद खत्म भी नहीं हुआ था कि राजस्थान के अजमेर शरीफ में नया विवाद शुरू हो गया. अजमेर शरीफ दरगाह को शिव मंदिर बताने वाली अर्जी को स्थानीय कोर्ट स्वीकार कर लिया है. कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस दिया है.
अयोध्या-काशी-मथुरा और संभल की तरह अजमेर शरीफ दरगाह का मामला भी कोर्ट पहुंच गया. हिन्दू सेना की अर्जी में अजमेर शरीफ दरगाह को महादेव का मंदिर बताया गया है. अजमेर की सिविल कोर्ट ने अर्जी को स्वीकार करते हुए सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया है. जवाब मांगा है. इस अर्जी पर 20 दिसंबर को अगली सुनवाई होगी.
हिंदू सेना के दावे को लेकर ऑल इंडिया सज्जादानशीन काउंसिल के अध्यक्ष सैयद नसीरूद्दीन चिश्ती ने नाराजगी जताई. औवेसी ने इस मामले को लेकर 1991 पूजा स्थल एक्ट का हवाला देते हुए पीएम को घेरा.
याचिका में रिटायर्ड जज हरबिलास सारदा की 1911 में लिखी किताब - अजमेर: हिस्टॉरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव का हवाला दिया गया. किताब में दरगाह के निर्माण में मंदिर का मलबा होने का दावा किया गया है. साथ ही गर्भगृह और परिसर में एक जैन मंदिर होने की बात कही गई है.
पुस्तक में कही गयी है ये बात
याचिकाकर्ता के वकील रामस्वरूप बिश्नोई ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश हरविलास शारदा की पुस्तक का हवाला दिया, जिसमें बताया गया है कि दरगाह के निर्माण में हिंदू मंदिर के मलबे का इस्तेमाल किया गया था. पुस्तक में दरगाह के भीतर एक तहखाने का विवरण दिया गया है, जिसमें कथित तौर पर एक शिव लिंग होने का दावा है. पुस्तक में दरगाह की संरचना में जैन मंदिर के अवशेषों का भी उल्लेख किया गया है और इसके 75 फीट ऊंचे बुलंद दरवाजे के निर्माण में मंदिर के मलबे के तत्वों का भी इसमें वर्णन है.
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