
जंग छिड़ी तो 4 दिन भी मैदान में टिक नहीं पाएगा पाकिस्तान, गोला-बारूद, हथियार... सब खस्ताहाल!
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आम तौर पर पाकिस्तान की सैन्य नीति भारतीय सेना की संख्यात्मक श्रेष्ठता का मुकाबला करने के लिए तेजी से लामबंदी पर केंद्रित है. भारतीय सैन्य कार्रवाई को विफल करने के लिए पाकिस्तानी सेना के पास अपने M109 हॉवित्जर के लिए 155 मिमी के गोले या BM-21 सिस्टम के लिए 122 मिमी के रॉकेट पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं.
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनावचरम पर है. इस आतंकी हमले में 26 निर्दोष सैलानियों की मौत हो गई थी, जिसे लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने अंजाम दिया था. भारत ने इस नरसंहार के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कुछ कठोर कूटनीतिक कदम उठाए हैं, जिनमें सबसे बड़ा फैसला 1960 का सिंधु जल संधि को निलंबित करना है. साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने बार-बार दोहराया है कि पहलगाम में निर्दोष नागरिकों की हत्या में शामिल आतंकियों और उनके आकाओं, इस हमले के साजिशकर्ताओं को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी.
इसके बाद पाकिस्तान को भारत की संभावित जवाबी कार्रवाई का डर सता रहा है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के अन्य नेता गीदड़भभकियां दे रहे हैं कि यदि भारत ने अटैक किया तो उसे खामियाजा भुगतना पड़ेगा. लेकिन आंकड़ों और पाकिस्तान के वर्तमान आर्थिक हालात को देखें तो वह युद्ध में भारत के सामने चार दिन से ज्यादा समय तक नहीं टिक सकता. पाकिस्तानी सेना गोला-बारूद की भारी कमी से जूझ रही है. यह कमी मुख्य रूप से पाकिस्तान के यूक्रेन और इजरायल के साथ हाल ही में किए गए हथियार सौदों के कारण है, जिससे उसका युद्ध भंडार खत्म हो गया है.
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पाकिस्तान के पास सिर्फ 96 घंटे तक का गोला-बारूद
सूत्रों ने बताया कि क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाओं के बीच, सेना को गोला-बारूद की आपूर्ति करने वाली पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री (POF) बढ़ती वैश्विक मांग और अपनी आउटडेटेड प्रोडक्शन फैसिलिटी के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए संघर्ष कर रही है. कई पाकिस्तानी नेताओं ने दावा किया है कि पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत सैन्य कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा कि उनके सशस्त्र बल भारतीय आक्रमण या दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देंगे. हालांकि, तस्वीर इतनी भी अच्छी नहीं है. सूत्रों ने बताया कि घटती आपूर्ति के कारण पाकिस्तान का गोला-बारूद भंडार केवल 96 घंटे तक युद्ध झेलने में सक्षम है, जिससे उसकी सेना असुरक्षित हो गई है.
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वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.







