
छह महीने बाद कहां खड़ा है कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन?
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किसान संघर्ष देश के आंदोलन के इतिहास का सबसे लंबा आंदोलन बन गया है. दिल्ली में कड़ाके की ठंड से गरमी की तपिश बढ़ गई है, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और किसान संगठनों के रिश्तों में जमी बर्फ अभी तक नहीं पिघली है. किसान और सरकार दोनों अभी भी वहीं पर खड़े हैं, जहां 180 दिन पहले थे. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर छह महीने से चल रहे किसान आंदोलन का क्या असर रहा?
देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे किसानों के आंदोलन का बुधवार को छह महीने पूरे हो गए हैं. किसान संघर्ष देश के आंदोलन के इतिहास का सबसे लंबा आंदोलन बन गया है. दिल्ली में कड़ाके की ठंड से गरमी की तपिश बढ़ गई है, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और किसान संगठनों के रिश्तों में जमी बर्फ अभी तक नहीं पिघली है. किसान और सरकार दोनों अभी भी वहीं पर खड़े हैं, जहां 180 दिन पहले थे. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर छह महीने से चल रहे किसान आंदोलन का क्या असर रहा? बता दें कि मोदी सरकार पिछले साल कृषि से जुड़े तीन नए कानून लेकर आई है. इसमें पहला-कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, दूसरा-कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक 2020 और तीसरा-आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020. इन कानूनों को सरकार किसानों की हित में बता रही है, लेकिन किसान इसे अपने हित में नहीं मान रहे हैं.
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