
'छत्रपति शिवाजी का अपमान करने वाले राज्यपाल...', भगत सिंह कोश्यारी के इस्तीफे पर बोले संजय राउत
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भगत सिंह कोश्यारी के इस्तीफे पर शिवसेना (UBT) सांसद संजय सिंह ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने जनता की आवाज सुनी होती तो उनका पहले ही तबादला कर दिया जाता. एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र की ऐतिहासिक शख्सियतों का अनादर करने वाले राज्यपाल का इस्तीफा आखिरकार मंजूर हुआ.
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है. उनकी जगह झारखंड के राज्यपाल को नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है. भगत सिंह कोश्यारी के इस्तीफे पर शिवसेना (UBT) सांसद संजय सिंह ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने जनता की आवाज सुनी होती तो उनका पहले ही तबादला कर दिया जाता. एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र की ऐतिहासिक शख्सियतों का अनादर करने वाले राज्यपाल का इस्तीफा आखिरकार मंजूर हुआ. वहीं आदित्य ठाकरे ने इसे महाराष्ट्र की बड़ी जीत बताया है.
भगत सिंह कोश्यारी के इस्तीफे को आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के लिए बड़ी जीत बताया है. आदित्य ठाकरे ने ट्वीट कर लिखा, "महाराष्ट्र के लिए बड़ी जीत. महाराष्ट्र विरोधी राज्यपाल का इस्तीफा मंजूर हुआ. छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा ज्योतिबा पुले और सावित्री बाई फुले, संविधान, विधानसभा और लोकतांत्रिक आदर्शों का लगातार अपमान करने वाले को राज्यपाल के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है!"
राज्यपाल के इस्तीफे पर क्या बोले संजय राउत?
वहीं शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा कि राज्यपाल का इस्तीफा मंजूर होना महाराष्ट्र पर कोई मेहरबानी नहीं है. यहां की जनता बीते एक साल से उनके बयानों को लेकर आंदोलन कर रही है. अगर जनता की आवाज सुन ली होती तो राज्यपाल का तुरंत तबादला कर दिया जाता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. आखिरी मिनट तक राज्यपाल का समर्थन किया जा रहा था, यह महाराष्ट्र कभी नहीं भूलेगा.
राउत ने कहा कि राज्य की जनता, राजनीतिक दल, छत्रपति शिवाजी महाराज के संगठनों ने मोर्चा संभाला और राज्य में पहली बार राज्यपाल के विरोध में लोग सड़कों पर उतरे. संजय राउत ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने राजभवन में भारतीय जनता पार्टी के एजेंट के रूप में कार्य किया. सरकार को नीचा दिखाने की कोशिश की गई. कैबिनेट की कई सिफारिशों को खारिज कर दिया गया. राज्यपाल दबाव में काम कर रहे थे.
नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर राज्यसभा सांसद ने कहा कि अब प्रदेश को नया राज्यपाल मिल गया है, पता नहीं उनका नाम बैस है या बायस्ड. हम नए राज्यपाल का स्वागत करते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में राज्यपाल बदलने की मांग कई साल से की जा रही है. राज्यपाल को तुरंत हटाना जरूरी था लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसा नहीं किया. राज्यपाल का कार्यकाल समाप्त होने दिया गया और सांप्रदायिक आदान-प्रदान में महाराष्ट्र के राज्यपाल ने इस्तीफा दे दिया. इतिहास में यह दर्ज होगा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करने वाले राज्यपाल का समर्थन भाजपा और केंद्र सरकार करेगी. नए राज्यपाल को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए और राजभवन को भाजपा कार्यालय नहीं बनना चाहिए.

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