
छत्तीसगढ़ में अस्पताल की भूमि के पट्टे में भ्रष्टाचार का आरोप, जांच को लेकर आज SC में सुनवाई
AajTak
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नवीन सिन्हा, जस्टिस कृष्णा मुरारी की बेंच इस मामले को सुनेगी. याचिका में अपील की गई है कि निजी अस्पताल में संपत्तियों की भूमि के पट्टे में जो कथित भ्रष्टाचार हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट में आज कई अहम मामलों की सुनवाई होनी हैं. इन्हीं में से एक छत्तीसगढ़ के भिलाई में निजी अस्पताल की संपत्ति के पट्टे में कथित भ्रष्टाचार का मामला है. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नवीन सिन्हा, जस्टिस कृष्णा मुरारी की बेंच इस मामले को सुनेगी. याचिका में अपील की गई है कि निजी अस्पताल में संपत्तियों की भूमि के पट्टे में जो कथित भ्रष्टाचार हुआ है, उसकी जांच सीबीआई को सौंप दी जाए. इस याचिका को अमित चंद्राकर द्वारा दाखिल किया गया है. जिसमें कहा गया है कि चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल अस्पताल प्राइवेट लिमिटेड के संबंध में कथित रूप से आपराधिक साजिश रचने और सरकारी पट्टे पर ली गई जमीन को लेकर वित्तीय धोखाधड़ी की जांच कराए जाने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता अश्वनी कुमार दुबे के जरिए दाखिल याचिका में ‘सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस’ द्वारा भी जांच कराए जाने का अनुरोध किया गया है. कहा गया है कि पट्टानामा की शर्तों के अनुसार, बैंक से ऋण लेने के लिए इसे गिरवी रखने की अनुमति नहीं थी. लेकिन निगम और बैंक अधिकारियों ने फिर से ऋण लिया और पैसों का गबन किया गया. ऐसे में अपील की गई है कि लीज डीड के अनुसार जमीन को बेचा नहीं जा सकता है और इसे हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है. हालांकि, संदिग्ध परिस्थितियों में बैंक ने पूरी परियोजना की ई-नीलामी शुरू की. ऐसे में मामले की जांच का आदेश दिया जाए.
पाकिस्तान ने रात के अंधेरे में अफगानिस्तान पर एक बार फिर हमला बोला है. पाकिस्तान ने ये एयरस्ट्राइक अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक नशा मुक्त केंद्र अस्पताल पर किया है. इस हमले में अबतक 400 से ज्यादा मासूमों की मौत हो गई है, वहीं 250 से ज्यादा घायल बताए जा रहे है. वहीं अस्पताल पर हमले के आरोप से पाकिस्तान ने इनकार किया है.

वृंदावन में बंदरों की शरारतें अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चुनौती बन गई हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के तीन दिवसीय दौरे से पहले चश्मा छीनने वाले बंदरों को काबू में रखने के लिए अनोखा उपाय किया गया है. वन्यजीव कानूनों के चलते असली लंगूरों की तैनाती संभव नहीं होने पर अब लंगूरों के कटआउट और विशेष टीमों के जरिए सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.











