
चूहे के सूखे शव से लेकर सुअर की आंख तक... इस देश में काफी फेमस हैं ये डिश
AajTak
खाने की ये डिश इतनी अजीब हैं कि इनके बारे में सुनकर ही लोगों को उलटी आ जाए. लेकिन ये इस क्षेत्र के लोगों द्वारा काफी पसंद भी की जाती हैं. डिश में कीड़े के सलाद से लेकर जानवर का सूप तक शामिल है.
दुनिया के तमाम देशों में खाने के लिए तरह तरह की डिश पसंद की जाती हैं. जो वहां की संस्कृति और लोगों की पसंद के बारे में भी बताती हैं. लेकिन चीन एक ऐसा देश है, जहां पसंद की जाने वाली डिश को लेकर पूरी दुनिया हैरानी जताती है. ऐसा खासतौर पर कोरोना वायरस महामारी के वक्त देखा गया था. आज हम चीन और एशिया के कुछ और देशों में पसंद की जाने वाली अजीबो गरीब डिश के बारे में जानेंगे. फ्राइ की हुई ड्रैगनफ्लाई- इसे युनान प्रांत में सबसे अधिक खाया जाता है. ये चीन का दक्षिणपश्चिमी प्रांत है. कीड़ों को फ्राइ करके परोसा जाता है.
फ्राइ किए हुए कैटरपिलर- उत्तर पूर्वी चीन में लोग फ्राय किए हुए कैटरपिलर खाना पसंद करते हैं. इन्हें पकाने से पहले पानी में भिगोया जाता है. फिर इन्हें प्याज और अदरक के साथ परोसते हैं.
काली चींटी- यहां युनान प्रांत में सुअर के पैरों के साथ काली चींटियों को पसोसा जाता है. सूप को सुअर की टांगों, काले चिकन और बीफ से बनाते हैं. सुअर की भुनी हुई आंखें- वियतनाम की सीमा से लगे दक्षिणी चीन के गुआंग्शी में ये एक पारंपरिक डिश हैं. इसमें सुअर की आंखों को तिरछा करके भूना जाता है. फिर नमक, तिल और मिर्च जैसे विभिन्न मसालों के साथ पकाया जाता है.
गाय के मल का सूप- ये डिश दक्षिण-पश्चिमी चीन के गुइजहौ प्रांत की है. ये गाय के मल से बनती है, लेकिन ये मल गोबर नहीं है. बल्कि गाय के पेट में मिलने वाला तरल पदार्थ है.
सूखा चूहा- दक्षिणपूर्वी चीन के फुजियान प्रांत में लोग सूखा चूहा खाना पसंद करते हैं. इसकी शुरुआत तब हुई, जब किसानों ने अपनी खेती को चूहों से बचाने के उन्हें पकड़ना शुरू किया. हाई प्रोटीन के लिए इन चूहों का इस्तेमाल अब खाने के लिए किया जाता है. इनका मानना है कि बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना या अचानक पेशाब निकल जाने की दिक्कत को दूर करने के लिए ये डिश अच्छी है.
कीड़े मकौड़ों का सलाद- इस सलाद को झींगुर से बनाया जाता है. इसमें सूखे झींगुर के साथ टमाटर, मूंगफली और मिर्च भी डालते हैं. ये लाओस और थाईलैंड में पसंद किया जाता है.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












