
चुनाव लड़ने वाली गांधी परिवार की 10वीं सदस्य होंगी प्रियंका, जानें अब तक का उनका सियासी सफर
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प्रियंका गांधी वाड्रा करीब डेढ़ दशक तक सक्रिय राजनीति में उतरने से कतराती रहीं. वह लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कामकाज देखती रही हैं. इस दौरान वह रायबरेली में अपनी मां सोनिया गांधी और अमेठी में अपने भाई राहुल के चुनाव अभियानों में सहायक की भूमिका में रहीं.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा चुनावी राजनीति में पहली बार एंट्री करने जा रही हैं. पार्टी ने तय किया है कि राहुल गांधी वायनाड लोकसभा सीट छोड़ेंगे और प्रियंका वहां होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस की आधिकारिक प्रत्याशी होंगी. वहीं, राहुल रायबरेली से सांसद बने रहेंगे. बता दें कि उन्होंने इस बार के लोकसभा चुनावों में रायबरेली और वायनाड से इलेक्शन लड़ा था और दोनों ही सीटों पर भारी वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. पिछले लोकसभा चुनाव में भी वह दो सीटों से लड़े थे, लेकिन अमेठी में उन्हें स्मृति ईरानी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. वह 2019 में वायनाड से जीतकर संसद पहुंचे थे.
जहां तक प्रियंका गांधी की बात है तो वह अपने अब तक के राजनीतिक सफर में पहली बार चुनाव लड़ेंगी. इससे पहले वह पार्टी संगठन में ही काम करती रही हैं. वह वर्तमान में कांग्रेस वर्किंग कमिटी की सदस्य भी हैं. प्रियंका 2004 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रचार अभियान में शामिल रहीं. यह राजनीति में उनका पहला मजबूत कदम था. उन्होंने दर्जनों संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में रैलियां कीं. 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में, जब राहुल गांधी ने कांग्रेस के लिए राज्यव्यापी प्रचार अभियान का जिम्मा संभाला, प्रियंका ने अमेठी-रायबरेली क्षेत्र की 10 सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित किया.
डेढ़ दशक तक सक्रिया राजनीति से दूर रहीं प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी वाड्रा करीब डेढ़ दशक तक सक्रिय राजनीति में उतरने से कतराती रहीं. वह लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कामकाज देखती रही हैं. इस दौरान वह रायबरेली में अपनी मां सोनिया गांधी और अमेठी में अपने भाई राहुल के चुनाव अभियानों में सहायक की भूमिका में रहीं. प्रियंका ने औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति में तब एंट्री की जब उन्हें 23 जनवरी, 2019 को उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से के लिए कांग्रेस पार्टी का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया. 11 सितंबर, 2020 को उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया.
ज्यादातर समय उत्तर प्रदेश में ही सक्रिय रहीं प्रियंका गांधी अक्टूबर 2021 में, प्रियंका गांधी को यूपी पुलिस ने दो बार हिरासत में लिया. पहली बार वह लखीमपुर खीरी जाने के दौरान हिरासत में ली गईं, जहां कुछ प्रदर्शनकारी किसान केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे के काफिले की गाड़ी चढ़ने से मारे गए थे. उन्हें और पार्टी के कई अन्य नेताओं को सीतापुर के एक पीएसी गेस्ट हाउस में 50 घंटे तक हिरासत में रखा गया था. दूसरी बार यूपी पुलिस ने उन्हें सीआरपीसी की धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए आगरा जाते वक्त हिरासत में लिया था, जब वह एक व्यक्ति के परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए आगरा जा रही थीं, जिनकी कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मृत्यु हो गई थी.

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