
ग्रीनलैंड के पास ऐसा क्या है? जिसे हर कीमत पर हासिल करना चाहते हैं ट्रंप, अब दिया ये बयान!
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर हर कीमत पर कब्जा करना चाहते हैं. उनका कहना है कि अमेरिकी सिक्योरिटी के लिए ग्रीनलैंड बहुत इम्पोर्टेंट है, लेकिन यह सिर्फ नेशनल सिक्योरिटी का ही मामला नहीं दिखाई देता है.
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कब्जा के बाद अब अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करना चाहता है, जिसके लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है. ग्रीनलैंड पर कब्जा को लेकर व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने इसे अमेरिकी सुरक्षा के लिए अहम बताया था और कहा था कि उनकी सरकार इसे हासिल करने के तरीके तलाश रही है, जिसमें सैन्य बल भी शामिल है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात कई बार कर चुके हैं. उनके नए बयान ने सरगर्मी और भी बढ़ा दी है. ट्रंप ने खुले तौर पर कहा है कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को 'आसान तरीके' से हासिल नहीं कर पाया, तो 'मुश्किल तरीका' अपनाएगा. ट्रंप ने आगे कहा कि वैसे मैं डेनमार्क का फैन हूं, वे मेरे साथ अच्छे रहे हैं.
ट्रंप ने कई बार यह कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड जरूरी है. वहां पर रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी चिंता की बात है और वे ग्रीनलैंड को चीन और रूस का पडोसी मुल्क नहीं बनने देना चाहते. इस कारण वे जल्द से जल्द इसपर कब्जा करेंगे. लेकिन सवाल उठता है कि क्या सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा का ही मामल है या फिर ग्रीनलैंड के पास मौजूद बेसकीमती चीजें ट्रंप के आंखों में जम गया है? आइए जानने हैं ग्रीनलैंड के पास क्या-क्या है और अमेरिका इसपर कब्जा क्यों चाहता है?
राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला सबसे बड़ा कारण राष्ट्रीय सुरक्षा का दिखाई देता है. यह लोकेशन अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ है. यह नॉर्थ पोल के सबसे नजदीक सैन्य ठिकानों में से एक है, जो आर्कटिक सर्कल में अमेरिका की सिक्योरिटी को और मजबूत कर सकता है. यहीं पर अमेरिका का 'पिटुफिक स्पेस बेस' भी है, जो आसमान से आने वाली मिसाइल, स्पेस सर्विलांस की जानकारी देता है. यह लोकेशन अमेरिका को रूस, यूरोप और चीन के नजदीक लेकर आता है. ऐसे में अगर अमेरिका का इसपर पूरी तरह से कंट्रोल होगा तो रूस और चीन जैसे देशों की गतिविधियों पर नजर रख पाएगा.
आधुनिक खजानों से भरा है ग्रीनलैंड ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का इरादा सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला नहीं लगता, क्योंकि यहां पर ढेर सारे आधुनिक खजाने हैं, जो अमेरिका की आज की जरूरत भी है. ग्रीनलैंड के पास रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) है, जिसके मिलने के बाद अमेरिका को चीन पर निर्भर नहीं रहने पड़ेगा, क्योंकि चीन रेयर अर्थ का 90 फीसदी तक हिस्सा कंर्टोल करता है. इसके अलावा, ग्रीनलैंड के पास यूरेनियम है, जिसका आयात अमेरिका अभी रूस से करता है. ग्रीनलैंड के पास लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, तेल और गैस भी बड़ी मात्रा में है.
अमेरिका के लिए नया ट्रेड रूट क्लाइमेट चेंज के कारण आर्कटिक में नई शिपिंग रास्ते खुल रहे हैं, जो एशिया-यूरोप और अमेरिका के बीच हजारो किलोमीटर की दूरी को कम कर देगा. रास्ता छोटा होने से व्यापार लागत कम हो सकता है. बर्फ पिघलने से नए रास्ते को 'आर्कटिक सिल्क रोड' कहा जा रहा है. इन रास्तों पर जिसका कंट्रोल होगा, वह ग्लोबल ट्रेड पर असर डाल सकता है. ग्रीनलैंड इन रास्तों के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेस है.

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