
गोरखपुरः श्मशान घाट के बाहर लगे बैनर, 'तस्वीरें लेना दंडनीय अपराध है', विवाद हुआ तो हटाए गए
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गोरखपुर में नगर निगम ने श्मशान घाटों के बाहर बड़े-बड़े बैनर लगा दिए हैं. चेतावनी दी गई है कि श्मशान घाट में फोटो या वीडियो लेना दंडनीय अपराध है.
उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है. मरीजों को अस्पतालों में बेड की कमी और ऑक्सीजन की किल्लत से जूझना पड़ रहा है. हर दिन कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वालों की संख्या भी रिकॉर्ड तोड़ रही है. यूपी के श्मशान घाटों से अक्सर ऐसी तस्वीरें और वीडियो आते रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में चिताएं जलती दिखाई रही हैं. प्रशासन का भी ध्यान मौतों को रोकने से ज्यादा आंकड़े छिपाने पर है. इसलिए प्रशासन श्मशान घाटों के बाहर बड़े-बड़े बैनर लगा रहा है, जिसमें चेतावनी लिखी है कि यहां फोटो या वीडियो लेना दंडनीय अपराध है.
मर तो वो 13 साल पहले गया था लेकिन मौत सचमुच तब उसके हिससे में आई जब इस चिता में लेटने के बाद जब हरीश की आत्मा की लाइट यानी रोशनी चिता से उठती इस आग के साथ मिलकर हमेशा-हमेशा के लिए ये दुनिया छोड़ गई. पर इस दुनिया को छोड़ने से पहले हरीश आजादा भारत के इतिहास का पहला भारतीय बन गया जिसे अदालत और अस्पताल ने मिलकर मां-बाप की इच्छा को ध्यान में रखते हुए इच्छामृत्यु दी.

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