
गैंगरेप के बाद महिला समेत दो बच्चों की हुई थी हत्या, रघुबीर नगर कांड के दोषियों को मिली मौत की सजा
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तीस हजारी कोर्ट ने दिल्ली के रघुबीर नगर में 8 साल पहले हुए गैंगरेप और तिहरे हत्याकांड में फैसला सुनाया है. कोर्ट ने तीनों आरोपियों को IPC की धारा 302 (हत्या) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत जघन्य अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई. वहीं अदालत ने तीनों को गैंगरेप और डकैती के अपराध में आजीवन कारावास की सजा दी है.
दिल्ली के रघुबीर नगर में 8 साल पहले एक महिला से गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी, साथ ही दो मासूम बच्चों को भी मौत के घाट उतारा गया था. अब इस मामले में मंगलवार को तीस हजारी कोर्ट ने सजा सुनाई है. कोर्ट ने मामले में तीनों दोषियों शाहिद, अकरम और रफत अली को मौत की सजा सुनाई है. ये तीनों ही दोषी यूपी के रहने वाले हैं. तीस हजारी कोर्ट की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज आंचल ने मंगलवार को फैसला सुनाया.
35000 रुपये का जुर्माना लगाया जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने तीनों आरोपियों को IPC की धारा 302 (हत्या) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत जघन्य अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई. वहीं अदालत ने तीनों को गैंगरेप और डकैती के अपराध में आजीवन कारावास की सजा दी है. इसके अलावा कोर्ट ने तीनों दोषियों पर 35000-35000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. बता दें कि, दिल्ली के रघुबीर नगर में 8 साल पहले एक महिला से गैंगरेप हत्या और दो मासूम बच्चों की हत्या हुई थी. तीस हजारी कोर्ट की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज आंचल ने इस केस में फैसला सुनाया है.
22 अगस्त को दोषी दिए गए थे करार कोर्ट ने तीनों दोषियों को IPC की धारा 302 (हत्या) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत जघन्य अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई है. तीनों पर ही गैंगरेप और डकैती के आरोप थे, जिसमें वह दोषी साबित हुए और इस अपराध में आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई है साथ ही, तीनों दोषियों पर 35000-35000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. तीस हज़ारी कोर्ट ने तीनों को 22 अगस्त को दोषी करार दिया था. कोर्ट ने मामले में पुलिस की जांच और हत्यारों के पास से बरामद सबूतों को अहम आधार माना था.
साजिश रचने का भी आरोप, पेंचकस से गोदकर हत्या कोर्ट ने कहा कि तीनों आरोपियों शाहिद, रफत अली और अकरम ने इस मामले में साजिश रची थी और नियोजित तरीके से उसे अंजाम दिया था. कॉल रिकॉर्ड और बयान यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि घटना की तारीख से पहले भी दोषियों शाहिद, अकरम और रफत अली और एक किशोरी के बीच साजिश की गई थी. फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि एक पैटर्न देखा गया है कि कोई भी कॉल बैक-टू-बैक नहीं की गई थी. कुछ मिनटों या घंटों के अंतराल के बाद कॉल की गई थी. हत्यारों ने गैंगरेप के बाद सबसे पहले पेचकस से गोदकर महिला की हत्या की. फिर उसका गला घोंट कर निश्चिंत हुए कि वह मर चुकी है. इसके बाद उसके दो बच्चों की भी हत्या कर दी और फिर घर में लूटपाट की थी.

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