
गुजरात में एशियाई शेरों की गिनती की तैयारी, हाईटेक तकनीक से लगाया जाएगा अनुमान
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Gujarat News: इस गणना में सरकारी अधिकारियों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों सहित 3000 से अधिक लोग शामिल होंगे. पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गिर में जंगल सफारी का आनंद लिया था और शेरों के बीच समय बिताया था, जिसके बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि हुई है.
गुजरात सरकार का वन विभाग हर पांच साल में एशियाई शेरों की जनगणना कराता है. इसके तहत 'एशियाई शेर-2025' की 16वीं जनसंख्या गणना 10 से 13 मई 2025 तक दो चरणों में आयोजित की जाएगी. इस गणना में सरकारी अधिकारियों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों सहित 3000 से अधिक लोग शामिल होंगे. पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गिर में जंगल सफारी का आनंद लिया था और शेरों के बीच समय बिताया था, जिसके बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि हुई है.
गुजरात ही नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव कहे जाने वाले एशियाई शेरों की गणना 10 से 13 मई के बीच होगी. प्रारंभिक जनसंख्या अनुमान 10 से 11 मई को और अंतिम जनसंख्या अनुमान 12 से 13 मई को किया जाएगा. यह गणना राज्य के 11 जिलों की 58 तहसीलों में कुल 35,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में होगी, जहां शेर मौजूद हैं. क्षेत्र का सर्वेक्षण 'डायरेक्ट बीट वेरिफिकेशन' पद्धति का उपयोग करके किया जाएगा.
नियमित रूप से किए जा रहे शेरों की जनसंख्या अनुमान, आकलन और संरक्षण कार्यों के परिणामस्वरूप राज्य में शेरों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है. प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1995 में की गई गणना में वयस्क नर, मादा, शावक सहित कुल 304 शेर दर्ज किए गए थे. इसी प्रकार, वर्ष 2001 में 327, वर्ष 2005 में 359, वर्ष 2010 में 411, वर्ष 2015 में 523 और वर्ष 2020 में कुल 674 शेर दर्ज किए गए.
एशियाई शेरों की जनसंख्या का अनुमान लगाने के लिए 'डायरेक्ट बीट वेरिफिकेशन' एक अत्यंत उपयोगी विधि है. यह विधि सांख्यिकी विश्लेषण और कार्यान्वयन में आसानी के कारण लगभग 100 प्रतिशत सटीकता प्रदान करती है, और मानक त्रुटि की सीमा लगभग शून्य रहती है.
यह पद्धति, जो तीन दशकों से अधिक समय से प्रयोग में है, जंगलों, घास के मैदानों, तटीय क्षेत्रों और राजस्व क्षेत्रों में प्रभावी और सुविधाजनक रूप से काम करती है. हर शेर की पहचान के लिए उच्च रिजॉल्यूशन वाले कैमरे, कैमरा ट्रैप जैसे तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया जाएगा.
कुछ शेरों को रेडियो कॉलर लगाए गए हैं, जो शेर और उसके समूह का पता लगाने में मदद करेंगे. इसके अलावा, जीआईएस सॉफ्टवेयर का उपयोग सर्वेक्षण क्षेत्रों को चित्रित करने और शेरों की गतिविधियों, वितरण पैटर्न और आवास उपयोग पर नजर रखने के लिए विस्तृत मानचित्र विकसित करने में किया जाएगा.

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