
गाजा में स्कूल और रिफ्यूजी कैंप पर इजरायली सेना का हवाई हमला, 17 लोगों की मौत
AajTak
इजरायली सेना ने गाजा सिटी में एक स्कूल पर हवाई हमले किए, जिसमें सात फिलिस्तीनियों की मौत हो गई. इसके साथ ही आईडीएफ ने केंद्रीय शहर दीर अल-बलाह में चल रही नगर पालिका की बैठक को भी निशाना बनाया, जिसमें 10 लोगों की जान चली गई. इस तरह कुल 17 लोगों की मौत हो गई है.
इजरायल ने एक बार फिर बेकूसर फिलिस्तीनियों पर कहर बरपा दिया. इजरायली सेना ने गाजा सिटी के एक स्कूल पर हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम एक महिला और उसके बच्चे समेत सात लोगों की मौत हो गई. अल-अहली बैपटिस्ट अस्पताल के मुताबिक माजदा वासिला स्कूल पर हुए हमले में 12 अन्य लोग घायल हो गए. इजरायल का कहना है कि शरणर्थियों के बीच हमास के लड़ाके छिपे हुए थे, जिन्हें निशाना बनाया गया.
फिलिस्तीनी प्रशासन का दावा है कि स्कूल में शरण लिए हुए लोगों में हमास का कोई लड़ाका नहीं था. वहां सभी आम लोग थे जिन पर बमबारी हुई है. एक विस्थापित महिला एताफ सादात ने कहा, "हमारी आंखों के सामने ही ये हमला हुआ है. इस हमले में कई लोग जल गए. कुछ लोगों के शव क्षत विक्षत हो गए. कई लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं. उनको निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अभी तक हमें सफलता नहीं मिली है.''
इजरायल ने स्कूल पर हमले के साथ-साथ मध्य गाजा पट्टी में नगरपालिका की चल रही बैठक पर भी हमले किए. केंद्रीय शहर दीर अल-बलाह के नगर पालिका परिसर पर चल रही बैठक पर हुए हमले में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए. बताते चलें कि पिछले साल अक्टूबर से ही इजरायल फिलिस्तीनियों पर भारी बमबारी कर रही है. फिलिस्तीन की दो फीसदी से ज्यादा की आबादी मारी जा चुकी है.
इजरायली नागरिकों की रिहाई के लिए विरोध प्रदर्शन शुरू
उधर, गाजा में बंधक बनाए गए इजरायली नागरिकों की रिहाई के लिए विरोध प्रदर्शन का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा. शनिवार को एक बार फिर हजारों प्रदर्शनकारी तेल अवीव की सड़कों पर उतर आए. इजरायल की सरकार से बंधकों की रिहाई के लिए गाजा में बमबारी रोकने और हमास से तुरंत समझौते की मांग की है. बंधक बनाए गए लोगों के परिजनों और दोस्तों को डर है कि समझौता नहीं हुआ तो ज्यादा से ज्यादा बंधक मारे जाएंगे.
ये प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब गाजा में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन मध्य-पूर्व देशों का दौर कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस्तीफा भी मांगा है. देश में आम चुनाव कराए जाने की भी मांग की है. उनका दावा है कि पीएम नेतन्याहू बंधकों को छुड़ाने में अबतक असमर्थन रहे हैं. ऐसे में उन्हे पद छोड़ देना चाहिए. अभी 100 से ज्यादा इजरायली हमास की कैद में हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?








