
गांधी जी के साथ आंदोलन से लेकर दिल्ली के सबसे यंग CM तक... कहानी शेर-ए-दिल्ली चौधरी ब्रह्म प्रकाश यादव की
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अगर दिल्ली के लोगों से पूछा जाए कि पहले मुख्यमंत्री का नाम क्या है? शायद ज्यादातर लोग मदन लाल खुराना का नाम लेंगे. लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि दिल्ली को अपना पहला मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना से 41 साल पहले यानी 1952 में मिला था. 1952 में जब दिल्ली भारतीय संघ का पार्ट-सी स्टेट बना तो कांग्रेस के चौधरी ब्रह्म प्रकाश यादव पहले मुख्यमंत्री चुने गए.
दिल्ली के सर्द मौसम में चुनावी माहौल गर्मा रहा है. सत्ता में आम आदमी पार्टी है और विपक्ष में बीजेपी और कांग्रेस. तीनों ही दल अपनी राजनीतिक पिच तैयार करने में लगे हैं. चुनावी दंगल में जीत के लिए बड़े दांव खेले जा रहे हैं और पटखनी के लिए पसीना बहाया जा रहा है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में अब तक हमने आपको 1993 से 2020 तक हुए सात चुनावों के नतीजे सिलसिलेवार बताए हैं. अब हम स्पेशल सीरीज में उन चेहरों की बात करेंगे, जिन्होंने दिल्ली का मैदान फतह किया और मुख्यमंत्री बने. शुरुआत 1952 की कहानी से कर रहे हैं.
यह वो साल था, जब दिल्ली में अंतरिम विधानसभा की व्यवस्था थी और 42 सीटों पर चुनाव हुए थे. दिल्ली में 36 एकल सदस्यों वाली विधानसभा सीटें थीं और 6 सीटें दो सदस्यों वाली थीं. यानी 36 सीटों पर एक ही उम्मीदवार विधायक चुना गया, जबकि 6 सीटों पर दो-दो उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे. कुल 48 सदस्य चुने गए थे. रीडिंग रोड सीट से कांग्रेस और जनसंघ दोनों ही पार्टी के उम्मीदवार चुनाव जीते थे. हालांकि, इस चुनाव के 4 साल बाद दिल्ली विधानसभा भंग कर दी गई और यहां प्रशासनिक व्यवस्था भी बदल गई. यानी फिर दिल्ली में दोबारा ऐसा कभी मौका नहीं आया.
जानिए चौधरी ब्रह्म प्रकाश यादव को...
अगर दिल्ली के लोगों से पूछा जाए कि पहले मुख्यमंत्री का नाम क्या है? शायद ज्यादातर लोग मदन लाल खुराना का नाम लेंगे. लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि दिल्ली को अपना पहला मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना से 41 साल पहले यानी 1952 में मिला था. 1952 में जब दिल्ली भारतीय संघ का पार्ट-सी स्टेट बना तो कांग्रेस के चौधरी ब्रह्म प्रकाश यादव पहले मुख्यमंत्री चुने गए. उन्हें योजना और विकास मंत्री का प्रभार भी सौंपा गया. उस समय उनकी उम्र सिर्फ 34 वर्ष थी. यादव अपने संगठनात्मक और प्रशासनिक कौशल के लिए जाने जाते थे. हालांकि, मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल करीब तीन साल (2 साल, 332 दिन) तक चला. 1955 में कांग्रेस ने गुरमुख निहाल सिंह को दिल्ली का दूसरा मुख्यमंत्री बनाया, जो 1956 तक अपने पद पर रहे. गुरमुख ने दरियागंज विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी. राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सालभर बाद विधानसभा भंग हो गई. बाद में 1966 में दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल अस्तित्व में आ गया.
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केन्या में जन्म और दिल्ली में पढ़ाई

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