
खुद को हारते देख अफगान राष्ट्रपति गनी ने तालिबान को दिया ये प्रस्ताव: रिपोर्ट
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तालिबान ने गुरुवार को रणनीतिक नजरिए से अहम शहर गजनी को भी अपने नियंत्रण में ले लिया. गजनी शहर काबुल से सिर्फ 150 किमी दूर है. अब तक तालिबान ने करीब 10 प्रांतीय राजधानियों को अपने कब्जे में ले लिया है. अमेरिकी इंटेलिजेंस ने भी आगाह किया है कि 90 दिनों के भीतर अफगानिस्तान की राजधानी काबुल तक तालिबान पहुंच जाएगा. ऐसे में, अब खबर आ रही है कि अफगानिस्तान की सरकार ने तालिबान को एक प्रस्ताव दिया है.
अफगानिस्तान की सरकार ने तालिबान को जंग खत्म करने के लिए सत्ता में साझेदार बनाने का प्रस्ताव दिया है. समाचार एजेंसी एएफपी ने सूत्रों के हवाले से ये खबर छापी है. सूत्र ने एएफपी एजेंसी से बताया कि उनकी सरकार ने मध्यस्थता कर रहे कतर को ये प्रस्ताव भेजा है. अफगानिस्तान की अशरफ गनी की सरकार ने हिंसा रोकने के लिए तालिबान को सरकार में हिस्सेदार बनाने का प्रस्ताव दिया है. (फोटो- अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी/गेटी इमेजेस) अफगानिस्तान की सरकार से जुड़े एक सूत्र ने अलजजीरा को बताया कि अफगान सरकार ने तालिबान को सत्ता में साझेदार बनाने का प्रस्ताव दिया है ताकि देश में जारी हिंसा का दौर थम जाए. अमेरिकी प्रतिनिधि जालमाय खालिजाद अफगानिस्तान के मुद्दे पर होने वाली एक अंतरराष्ट्रीय बैठक के लिए कतर पहुंचे हैं. अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने बताया कि अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा के लिए इस सप्ताह दोहा में दो अहम बैठकें हो रही हैं. नेड प्राइस ने कहा कि बैठक में अफगानिस्तान में हिंसा रोकने और बलपूर्वक आई किसी भी सरकार को मान्यता ना देने को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की जाएगी. (फोटो- अफगानिस्तान के उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह/गेटी इमेजेस)
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.








