
खालिस्तान प्रेम या ट्रूडो की वोटों की मजबूरी... कनाडा से बढ़े तनाव के पीछे का गणित समझ लीजिए
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भारत और कनाडा के रिश्ते बद से बदतर हो गए हैं. खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले को लेकर एक साल से जारी तनाव सोमवार को तब और बढ़ गया जब कनाडा ने भारतीय राजनयिकों को सीधे-सीधे आरोपी बना दिया. ट्रूडो ने दावा किया कि हत्याकांड से जुड़े सबूत भारत को दिए हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर क्यों ट्रूडो खालिस्तान समर्थकों कों इतना पसंद करते हैं?
पहले से खराब भारत और कनाडा के रिश्ते और खराब हो गए हैं. खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर सोमवार को जिस तरह से घटनाक्रम बदले, उसने भारत और कनाडा के बीच एक बार फिर नया राजनयिक संकट खड़ा कर दिया है.
कनाडा के पुलिस कमिश्नर ने आरोप लगाया था भारतीय राजनयिक और कॉन्सुलर अधिकारी सीधे तौर पर या एजेंटों के जरिए भारत सरकार के लिए जानकारी जुटाने के लिए अपने पद का फायदा उठाते हैं. इसके बाद कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया कि हमने भारत के एजेंटों के आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के सबूत दिए थे. भारत से बार-बार आग्रह के बावजूद कोई सहयोग नहीं किया.
इसके बाद भारत ने कनाडा में अपने उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा समेत कई राजनयिकों को वापस बुला लिया है. इसके साथ ही भारत ने कनाडा के छह राजनयिकों को भी निष्कासित कर दिया है और उन्हें 19 अक्टूबर तक भारत छोड़ने को कह दिया है.
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक बार फिर आरोप लगाया कि कनाडा की सरजमीं पर कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंट शामिल रहे हैं. हालांकि, भारत इन सभी आरोपों को खारिज करता रहा है. सोमवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने दोबारा इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया. साथ ही ये भी कहा कि ट्रूडो 'वोट बैंक' की राजनीति कर रहे हैं.
क्या जानबूझकर कर रहे हैं ट्रूडो ऐसा?
जस्टिन ट्रूडो 2015 से कनाडा के प्रधानमंत्री हैं. पहली बार सत्ता में आने के बाद ट्रूडो ने अपनी कैबिनेट में 4 सिख सांसदों को मंत्री बनाया. उस चुनाव में कुल 17 सिख सांसद जीते थे. इनमें से 16 ट्रूडो की लिबरल पार्टी से थे.

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