
खामेनेई के लिए मौत से बदतर सजा चाहता था ईरानी फिल्ममेकर, निकाली भड़ास- जिंदा पकड़ना था
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ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद फिल्ममेकर मोहम्मद रसूलोफ ने इंस्टाग्राम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौत उनके लिए आसान अंत था और उन्हें जिंदा पकड़ा जाना चाहिए था। जानिए पूरा बयान और रसूलोफ की अगली फिल्म से जुड़ी जानकारी।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ भारत में रह रहीं- एक्ट्रेस मंदाना करीमी, एलनाज नौरोजी ही नहीं बल्कि और भी कई सेलेब्स हैं. जो ईरान में ही रह रहे हैं, और उनकी मौत की दुआ मांग रहे थे. लेकिन वहीं एक फेमस फिल्म मेकर मोहम्मद रसूलोफ हैं जो खामेनेई की मौत से भी खुश नहीं हैं. उनका कहना है कि ईरान सुप्रीम लीडर का अंत आसानी से हुआ है, जो कि नहीं होना चाहिए था.
रसुलोफ ने निकाली भड़ास
मोहम्मद रसूलोफ को ईरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार का विरोध करने की वजह से काफी परेशानियों और कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा था. रविवार को जब अमेरिका और इजराइल के जॉइंट ऑपरेशन में सुप्रीम लीडर की हत्या हुई, तो रसूलोफ ने उन्हें- आज के दौर के ईरान के इतिहास का सबसे ज्यादा नफरत किया जाने वाला इंसान बताया.
रसुलोफ ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर लिखा- आज के ईरान के इतिहास के सबसे नफरत किए गए शख्स के लिए, जिसके नाम पर कई गंभीर आरोप हैं और जिसे ईरानी जनता और इंसानियत के सामने कई बार सजा मिलनी चाहिए थी, उसके लिए मौत बहुत सस्ता अंत है. काश उसे जिंदा पकड़ा जाता… उसने धर्म और झूठी पवित्रता की आड़ में इंसानियत का सबसे अंधेरा चेहरा दिखाया. उसकी वजह से ईरान की कई पीढ़ियों ने भारी कीमत चुकाई है और आगे भी चुकानी पड़ेगी.
'उसके साए में, जो घमंड और अपनी बीमार सोच में डूबा हुआ था, धन और सत्ता का एक बड़ा भ्रष्ट नेटवर्क खड़ा हो गया. ये सिस्टम इस ‘नंगे राजा’ के बेकार आदर्शों के लिए मौत को एक तरह से उद्योग की तरह इस्तेमाल कर रहा था. दुख की बात है कि ‘खामेनेईवाद’ अब एक सोच बन चुका है. ये आपराधिक गिरोह उन लोगों से बना है जिनके पास अवैध पैसा और ताकत है. इन्होंने दशकों तक ईरान के संसाधनों को लूटा और इस्लामी गणराज्य की भ्रष्ट व्यवस्था में अपनी पकड़ मजबूत कर ली. अब आजादी की मुश्किल राह पर नए दिन हमारा इंतजार कर रहे हैं.'
रसूलोफ की अगली फिल्म 39 मिनट की शॉर्ट फिल्म है, जिसका नाम सेंस ऑफ वॉटर है. यह उनकी उस फीचर फिल्म के बाद आ रही है जिसे कान फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल ज्यूरी प्राइज मिला था. रसूलोफ अपनी मजबूत राजनीतिक फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, जो बिना सीधे भाषण दिए, विजुअल स्टोरीटेलिंग के जरिए अपना संदेश पहुंचाती हैं.

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