
खरगोन हिंसा में घायल हुए एसपी सिद्धार्थ चौधरी की जगह प्रशासन ने इन्हें दी बड़ी जिम्मेदारी
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मध्य प्रदेश में खरगोन हिंसा के बाद अब रोहित काशवानी को प्रभारी एसपी नियुक्त कर दिया गया है. जब तक सिद्धार्थ चौधरी ड्यूटी वापस ज्वाइन नहीं कर लेते हैं, ये पद रोहित काशवानी संभालेंगे.
मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी के जुलूस पर पथराव वाले मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. उस घटना में घायल हुए खरगोन एसपी सिद्धार्थ चौधरी की जगह प्रशासन ने कुछ समय के लिए रोहित काशवानी को प्रभारी एसपी नियुक्त कर दिया है. जब तक सिद्धार्थ चौधरी ड्यूटी वापस ज्वाइन नहीं कर लेते हैं, ये पद रोहित काशवानी संभालेंगे.
जानकारी के लिए बता दें कि उपद्रवियों द्वारा रामनवमी जुलूस पर पत्थराव किया गया था. उस हमले में खरगोन एसपी सिद्धार्थ चौधरी समेत करीब दो दर्जन लोग घायल हुए थे. मामले में एक्शन लेते हुए एमपी प्रशासन ने यूपी की तरह बुलडोजर वाली कार्रवाई की थी और कई घरों-दुकानों को गिराया था. उनकी तरफ से उस घर को धाराशायी कर दिया गया जिसे पीएम आवास योजना के तहत बनाया गया था.
लेकिन अभी उस बुलडोजर वाली कार्रवाई का विपक्ष विरोध कर रहा है. इस समय मध्य प्रदेश सरकार के सामने ये बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. सवाल पूछे जा रहे हैं कि किस आधार पर किसी की प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चला दिए गए. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने एक कदम आगे बढ़कर सवाल दाग दिया है कि ये देश संविधान से चलेगा या फिर किसी की आस्था से?
उनकी नजरों में इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही सब फैसला कर लिया था. कौन दोषी है, किसके खिलाफ कार्रवाई करनी है. ऐसे में ओवैसी मानते हैं कि जब सब कुछ पहले से तय कर लिया गया है, तो गोली मार दीजिए, जीनोसाइड कर दीजिए. ओवैसी के इन आरोपों पर मध्य प्रदेश सरकार में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का सिर्फ इतना कहना है कि विपक्ष को सिर्फ बुलडोजर दिखाई दे रहा है. उन्हें ये नहीं दिख रहा कि पूरे साल में सिर्फ एक बार रामनवमी का त्योहार आता है, लेकिन फिर भी अलग-अलग राज्यों में दंगे होने लगते हैं. उनके मुताबिक करौली में भी हिंसा हुई थी. अभी तक मुख्य आरोपी पकड़ा नहीं गया है. लेकिन राहुल गांधी और सोनिया ने कोई ट्वीट नहीं किया. ऐसे में उन्होंने विपक्ष की सलेक्टिव अप्रोच पर सवाल खड़े किए हैं.

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