
क्यों टिक नहीं पा रहे हैं बिहार के पुल, अब तक 12 गिरे, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
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जनहित याचिका में पिछले दो सालों में दो बड़े पुलों और छोटे, मझोले कई पुलों के निर्माणाधीन या बनने के फौरन बाद गिरने, ढहने और बहने की घटनाओं का जिक्र किया गया हैं.
बिहार (Bihar) में लगभग रोज क्या नए, क्या पुराने या क्या निर्माणाधीन, पुल एक-एक करके जल समाधि ले रहे हैं. बुधवार को तो हद ही हो गए जब राज्य के दो जिलों सीवान और छपरा में एक ही दिन में पांच पुल ध्वस्त हो गए. ऐसा लगता है कि पुल-पुलिया गिरने का मौसम चल रहा है. लगातार पुल गिरने की इन घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका डाली गई है. एडवोकेट ब्रजेश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर राज्य में मौजूद और हाल के वर्षों में हुए छोटे बड़े पुलों के सरकारी निर्माण का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का आदेश देने की गुहार लगाई है.
इसके अलावा पुल सहित सरकारी निर्माण की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए एक समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक नीति और उसके परिपालन के लिए गाइड लाइन तैयार करने का आदेश देने की भी गुहार लगाई गई है.
12 पुलों के ढहने और बहने का जिक्र
याचिका में पिछले दो सालों में दो बड़े पुलों और छोटे, मझोले कई पुलों के निर्माणाधीन या बनने के फौरन बाद गिरने, ढहने और बहने की घटनाओं का जिक्र किया गया हैं. याचिका में कहा गया है कि बिहार बाढ़ प्रभावित राज्य है, यहां 68,800 वर्ग किलोमीटर यानी 73.6 फीसद भू-भाग भीषण बाढ़ की चपेट में आता है.
याचिका में पिछले दो सालों में 12 पुलों के ढहने बहने की घटनाओं का हवाला दिया गया है. इसके साथ ही याचिका में बिहार सरकार, केंद्रीय सड़क परिवहन और उच्च पथ मंत्रालय, हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया, पथ निर्माण और परिवहन मंत्रालय, पुल निर्माण निगम सहित कुल 6 पक्षकार बनाए गए हैं.
आरजेडी ने उठाया सवाल

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