
'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में दिखाई गई गुड टच-बैड टच की कहानी, एकता कपूर ने बताई वजह
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'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के हालिया ट्रैक में शो ने एक बेहद संवेदनशील लेकिन जरूरी विषय 'गुड टच और बैड टच' को अपनी कहानी का हिस्सा बनाया है. इस पर अब एकता कपूर ने अपनी बात रखी है.
बीते दिनों एक टीवी शो 'रिमझिम: छोटी उम्र बड़ा सफर' में नाबालिग लीड एक्ट्रेस को अपने से बड़े मेल को-स्टार के साथ इंटीमेट होते हुए दिखाया गया था. सीन वायरल होने के बाद इसकी काफी अलोचना हुई थी. अब इसी कड़ी में एकता कपूर ने अपने फेमस शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में एक सामाजिक मुद्दे को शामिल किया, जिसे देखने के बाद हर कोई इंप्रेस हो गया.
हाल ही में 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' की स्टोरी में गुड टच और बैड टच की स्टोरी को दिखाया गया है. इस बारे में अब शो की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने भी अपना रिएक्शन दिया है.
क्या दिखाया गया शो में? 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के लेटेस्ट एपिसोड में उस वक्त एक गहरा बदलाव आता है जब परी की बेटी गरिमा एक दर्दनाक किडनैपिंग की घटना से गुजरती है. अक्सर टीवी शोज में ऐसी घटनाओं को दिखाकर आगे बढ़ जाया जाता है, लेकिन यहां मेकर्स ने इसके मानसिक असर पर ध्यान केंद्रित किया है. तुलसी गरिमा के पास बैठती है और उसे बहुत ही प्यार से 'गुड टच और बैड टच' (Good and Bad Touch) के बीच का अंतर समझाती है.
वह गरिमा को यह भरोसा दिलाती है कि अगर उसे कुछ भी गलत महसूस हो, तो उस पर चुप्पी साधने के बजाय बोलना कितना जरूरी है. यह सीन केवल डर दिखाने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों को जागरूक और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बुना गया है.
एकता कपूर ने इस पर क्या कहा? शो की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने इस ट्रैक को लेकर अपने विचार शेयर किए हैं. उनका मानना है कि जब तुलसी जैसा लोकप्रिय और भरोसेमंद किरदार टेलीविजन पर किसी संवेदनशील मुद्दे पर बात करता है, तो उसका असर सीधे लोगों के दिलों पर पड़ता है. एकता ने बताया कि वीरानी परिवार पर दर्शकों का जो अटूट विश्वास है, वह उनके कंधों पर एक बड़ी जिम्मेदारी भी डालता है. उन्होंने कहा कि गरिमा के जरिए 'गुड टच और बैड टच' का मुद्दा उठाना सिर्फ कहानी की मांग नहीं थी, बल्कि यह सालों से चली आ रही सामाजिक चुप्पी को तोड़ने की एक कोशिश थी. जब तुलसी स्क्रीन पर शारीरिक सीमाओं की बात करती है, तो यह घर बैठे माता-पिता को भी अपने बच्चों से ऐसी बातें करने का हौसला देती है.
एकता ने इमोशनल होते हुए कहा कि अगर इस कहानी की वजह से एक भी परिवार में खुली बातचीत शुरू होती है या कोई बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है, तो उनका यह शो बनाने का मकसद पूरा हो जाता है.













