
क्या है मुक्त आवाजाही बंदोबस्त, जो पूर्वोत्तर के लिए खतरा बन चुका था, केंद्र ने लगाई रोक
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म्यांमार और भारत के बीच मुक्त आवाजाही खत्म कर दी गई है. गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को इसपर आदेश जारी किया. दोनों देशों के बीच करीब 1600 किलोमीटर लंबा बॉर्डर है, जिससे लोग बिना वीजा अंदर आ-जा सकते हैं. रिश्ते बनाए रखने के लिए जारी ये बंदोबस्त भारत के लिए मुसीबत बन चुका था.
फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) पर कई महीनों से काफी बात हो रही थी. अंदाजा लगाया जा रहा था कि म्यांमार से सटी भारतीय सीमा में इसपर रोक लग सकती है. असल में इसके जरिए म्यांमार से उग्रवादी ताकतें देश के भीतर आ रही थीं, यहां तक कि धड़ल्ले से तस्करी भी हो रही थी. इसे रोकने के लिए FMR को बंद करने की बात हुई. अब गृह मंत्रालय की तरफ से इसपर आधिकारिक आदेश भी आ चुका.
क्यों दी गई थी छूट
मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश की सीमाएं म्यांमार से सटी हुई हैं. ये बॉर्डर 1600 किलोमीटर लंबा है. दोनों ही सीमाओं पर पहाड़ी आदिवासी रहते हैं, जिनका आपस में करीबी रिश्ता रहा. उन्हें मिलने-जुलने या व्यापार के लिए वीजा की मुश्किलों से न गुजरना पड़े, इसके लिए भारत-म्यांमार ने मिलकर ये तय किया कि सीमाएं 16 किलोमीटर तक वीजा-फ्री कर दी जाएं.
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कब शुरू हुआ बंदोबस्त
साल 2018 में मुक्त आवाजाही पॉलिसी बनी, जो भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत आती थी. इसके तहत देश दक्षिण पूर्व के अपने पड़ोसियों से मेलजोल बनाकर रखने पर जोर देता रहा. इसमें आर्थिक और सामाजिक दोनों ही मेलमिलाप शामिल हैं. इसका एक मकसद ये भी है कि चीन के साथ शक्ति का संतुलन बना रह सके.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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