
क्या है पैरोल-इन प्लेस, जिससे लाखों लोगों को मिल सकती है अमेरिकी नागरिकता, कितने भारतीय कतार में?
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अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 10 लाख से ज्यादा पेशेवर भारतीय ग्रीन कार्ड के इंतजार में हैं. दूसरे देशों के लोग भी अमेरिकी नागरिकता के लिए लंबी कतार में हैं. इस बीच राष्ट्रपति चुनावों के ऐन पहले प्रेसिडेंट जो बाइडेन एक बड़ा दांव खेलते दिख रहे हैं जिससे लाखों अप्रवासियों के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता आसान हो जाएगा.
नवंबर में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं. इससे ठीक पहले वाइट हाउस ने एलान किया कि बाइडेन प्रशासन आने वाले समय में दस्तावेजों के बगैर रह रहे लोगों को अपने यहां बसने और नागरिकता के लिए आवेदन की इजाजत देगा. इससे 5 लाख से ज्यादा इमिग्रेंट्स को फायदा हो सकता है. इस स्कीम को पैरोल-इन-प्लेस ग्रीन कार्ड कहा जा रहा है. जानिए, ग्रीन कार्ड क्या है, और कितने भारतीय इसका इंतजार रहे रहे हैं.
क्यों है नया प्रपोजल चर्चा में
पैरोल इन प्लेस लीगल तरीका है, जिसके तहत बगैर डॉक्युमेंट्स के अमेरिका में रह रहे लोगों और उनके परिवार को बगैर डर देश में रहने की अनुमति मिलती है. इस बीच वे स्थाई नागरिकता के लिए आवेदन भी कर सकते हैं. बता दें कि दस्तावेजों के बिना रहते इमिग्रेंट्स अवैध माने जाते हैं, और अमेरिका तो क्या, कोई भी देश उन्हें स्वीकार नहीं करता है.
प्रस्तावित स्कीम के तहत उन लोगों को रखा जाएगा, जो किसी अमेरिकी नागरिक से शादी के बाद कम से कम 10 साल अमेरिका में रह चुके हों. या फिर वे बच्चे भी इसके हकदार हो सकते हैं जिनके पेरेंट्स में से किसी ने अमेरिकी सिटिजन से शादी की हो. एक तरह से देखा जाए तो यह मानवाधिकार पैरोल है, जो उन्हें मिलता है जो लोग पहले से ही अमेरिका में रह रहे हैं. ये साढ़े 5 लाख से ज्यादा लोगों को अस्थाई वैधता और काम करने की छूट देगा. इस बीच वे वैधता के लिए ग्रीन कार्ड की मंजूरी भी ले सकते है.
परिवार को साथ रखने में करेगा मदद
पैरोल-इन प्लेस खासकर उन लोगों के लिए है, जिनके पति या पत्नी गैर-अमेरिकी हैं. दस्तावेज न होने पर वे लंबे समय के लिए अलग रहने को मजबूर होते हैं, जिसका कुल असर प्रोडक्टिविटी पर भी होता है. अब नया प्रस्ताव इस दूरी को पाट सकता है.

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